राजनाथ सिंह के 'हिन्दू आतंकवाद' संबंधी बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार

राजनाथ सिंह के 'हिन्दू आतंकवाद' संबंधी बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार

लोकसभा में राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के यूपीए सरकार पर आतंकवाद के विरोध में लड़ाई को कमजोर करने के आरोप लगाने के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। राजनाथ सिंह ने कहा था कि 'हिन्दू आतंकवाद' शब्द का इजात कर कांग्रेस पार्टी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया।

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि बीजेपी भटकाव की राजनीति कर रही है। एनडीटीवी से बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सुशील कुमार शिंदे ने संसद के बाहर बयान दिया था और उन्होंने हिन्दू आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं किया था। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह गलत तरीके से शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने यूपीए की पूर्व सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 'हिंदू आतंकवाद' की नई शब्दावली गढ़कर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया। इसके लिए उसने कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद से बधाई पाई, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ऐसी शर्मनाक स्थिति कभी पैदा नहीं होने देगी।

पंजाब के गुरदासपुर में 27 जुलाई को हुए आतंकवादी हमले के बारे में लोकसभा में अपना लिखित बयान पढ़ने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही।

उन्होंने कहा, यूपीए के गृह मंत्री ने था हिंदू आतंकवाद की नई टर्म इजात करके आतंकवादी घटनाओं की जांच की दिशा को बदलने का काम किया। यूपीए के गृह मंत्री द्वारा हिंदू आतंकवाद की टर्म को इजात किए जाने पर हाफिज सईद ने उन्हें बधाई दी थी।

गृह मंत्री ने कहा था, लेकिन ऐसी शर्मनाक स्थिति यह सरकार नहीं होने देगी। आतंकवाद, आतंकवाद होता है, उसका हिंदू मुसलमान, या कोई जाति, पंथ और धर्म नहीं होता। राजनाथ सिंह के इन आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार आतंकवाद का राजनीतिकरण कर रही है।

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गृह मंत्री ने कहा था कि आतंकवाद देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और इस मुद्दे पर न तो संसद को और न ही देश को विभाजित दिखना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि वह इस मुद्दे पर चर्चा और उसका जवाब देने के लिए तैयार हैं। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा संसद में सरकार के खिलाफ नारेबाजी किए जाने पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था, एक ओर शहादत हो और दूसरी ओर सदन में शोरशराबा हो, इसे देश कैसे स्वीकार करेगा?