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दिल्ली विधानसभा चुनाव: अजय माकन को दिल्ली में चेहरा बनाएगी कांग्रेस

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नई दिल्ली: दिल्ली चुनावों की घोषणा भले ही अभी नहीं हुई है, लेकिन सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को अपना चेहरा बनाकर पेश कर दिया है। वहीं अब खबर है कि कांग्रेस आला कमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन को अपने चुनाव प्रचार अभियान का जिम्मा सौंपने का फैसला किया है। दरअसल पिछली बार कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी इस बार मैदान में दिग्गजों को उतारने का मन बना रही है।

एनडीटीवी से बात करते हुए अजय माकन ने कहा कि आप को समर्थन देने से जुड़ी शीला दीक्षित की टिप्पणी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कैंट बोर्ड के चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है और हम यूं ही किसी को वॉक ओवर नहीं दे सकते। भ्रष्टाचार को कांग्रेस किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं करती है।

इसके साथ यह भी कहा जा रहा है कि माकन नई दिल्ली या सदर बाजार में से किसी एक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस कृष्णा तीरथ, महाबल मिश्रा और जेपी अग्रवाल को भी विधानसभा चुनाव लड़वा सकती है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में दो चुनाव लगातार जीती और इससे पहले का चुनाव भी जीती थी। यानी लगातार 15 वर्षों से दिल्ली में सत्ता में रही कांग्रेस को पिछले चुनाव में महज आठ सीटें ही हासिल हुई थीं।

पिछले चुनाव में दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपना दमखम दिखाया था और चुनावी मैदान में भाजपा को पूर्ण बहुमत से ही नहीं रोका बल्कि 28 सीटें जीतकर देश की राजनीति में इतिहास बना दिया। चुनावी गणित के बदलते समीकरणों की वजह से पार्टी की सरकार भी बनी। वहीं, कांग्रेस पार्टी इतनी कमजोर साबित हुई कि आम चुनावों में पार्टी के दिल्ली की एक भी सीट हासिल नहीं हुई और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने सभी सातों सीटों पर कब्जा कर लिया। दिल्ली की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर भी नहीं आ सकी और इन सभी सीटों पर आप प्रत्याशी ही रनर अप रहे।

लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी शीला दीक्षित के दिल्ली की राजनीति से संन्यास लेने के बाद उनकी भरपाई के लिए पुराने कांग्रेसी दिग्गजों को ही मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। पार्टी का मानना है कि अपना जनाधार बनाने के लिए जरूरी है कि पार्टी अपने पूर्व सांसदों और पार्टी के राज्य इकाई के अध्यक्षों को मैदान में उतारे और  चुनावी दंगल में अपना दमखम दिखाए।


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