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जम्मू-कश्मीर दौर पर पहुंचे राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को एयरपोर्ट से ही वापस लौटाया गया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के कई नेता आज जम्मू कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस लौटा दिया गया.

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जम्मू-कश्मीर दौर पर पहुंचे राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को एयरपोर्ट से ही वापस लौटाया गया

राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं को वापस लौटा दिया गया.

खास बातें

  1. जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे विपक्षी नेता
  2. दल में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे
  3. सभी नेताओं को एयरपोर्ट से वापस भेजा गया
नई दिल्ली :

कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के कई नेता आज जम्मू कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस लौटा दिया गया. सभी नेता अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों को हटाए जाने के बाद वहां की स्थिति का जायजा लेने गए थे. इस दौरे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल, आनंद शर्मा, सीपीएम के सीताराम येचुरी, डीएमके के तिरुचि सिवा, टीएमसी के दिनेश त्रिवेदी, सीपीआई के डी राजा, एनसीपी के मजीद मेनन, आरजेडी के मनोज झा, जेडीएस के कुपेंद्र रेड्डी और शरद यादव गए थे. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी को कश्मीर आने का न्योता दिया था.

इससे पहले प्रशासन ने उन्हें यह कहते हुए यहां नहीं आने का अनुरोध किया था कि हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, इसमें बाधा डालने के प्रयास नहीं किए जाने चाहिए. जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने ट्वीट करते हुए कहा था, "ऐसे समय में जब सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को सीमा पार आतंवाद और आतंकियों व अलगाववादियों के हमले से बचाने की कोशिश कर रही है और बदमाशों व उपद्रवी तत्वों को नियंत्रित कर धीरे-धीरे सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल करने की कोशिश कर रही है, इस स्थिति में वरिष्ठ राजनेताओं के द्वारा सामान्य होते हालात को छेड़ने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए." 


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ट्वीट में आगे यह भी कहा गया, "नेताओं से सहयोग करने और श्रीनगर न आने का अनुरोध किया जा रहा है क्योंकि ऐसा करने से अन्य लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है." प्रशासन ने ट्वीट कर यह भी कहा था, "वे (नेता) उन प्रतिबंधों का भी उल्लंघन कर रहे होंगे जो अभी भी कुछ क्षेत्रों में लगे हैं. वरिष्ठ नेताओं को यह समझना चाहिए कि मानव जीवन में शांति व्यवस्था को बनाए रखने और नुकसान रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी."।



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