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कांग्रेस MP ने बताया राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान वे क्यों थे गैर हाजिर

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पांच-पांच सांसदों सहित विपक्ष के करीब 20 सांसद अनुपस्थित रहे.

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कांग्रेस MP ने बताया राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान वे क्यों थे गैर हाजिर

तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आईयूएमएल और केरल कांग्रेस के एक- एक सदस्य भी वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहे.

नई दिल्ली:

तीन तलाक विधेयक पर राज्यसभा में वोटिंग के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पांच-पांच सांसदों सहित विपक्ष के करीब 20 सांसद अनुपस्थित रहे. यह जानकारी सूत्रों ने दी. सत्तारूढ़ दल ने ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019' को राज्यसभा में 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित करा लिया. कांग्रेस सांसद विवेक तनखा भी वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं थे. उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि सुबह 10 बजे ही जानकारी मिली थी.

विवेक तन्खा ने बताया, 'तीन तलाक बिल के राज्यसभा में पेश किए जाने की जानकारी मुझे सुबह 10 बजे उस वक्त मिली, जब मैं एक मामले में पेश होने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में घुसा था. मैंने पार्टी नेतृत्व से छत्तीसगढ़ जाने के लिए परसों ही इजाजत मांगी थी.'

गुलाम नबी आजाद ने कहा, तीन तलाक बिल चुपके से मंगलवार को लाया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि तीन तलाक बिल पर हमें व्हिप जारी करने का मौका नहीं मिला. वहीं, कांग्रेस नेता शर्मा ने इस पर कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि तीन तलाक बिल की वोटिंग के दौरान कोई भी कांग्रेस नेता जानबूझकर नदारद नहीं रहा.


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सूत्रों ने बताया कि विपक्ष के सदस्य अगर सदन में मौजूद होते तो वह विधेयक को प्रवर समिति के पास भिजवा सकता था. कांग्रेस के जो पांच सदस्य गैर हाजिर रहे उनमें विवेक तनखा, प्रताप सिंह बाजवा, मुकुट मिथी और रंजीब बिस्वाल के अलावा संजय सिंह भी हैं. संजय सिंह ने इससे पहले मंगलवार को ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस और सपा सदस्यों के अलावा राकांपा के वरिष्ठ नेता शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल भी सदन में अनुपस्थित रहे. इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आईयूएमएल और केरल कांग्रेस के एक- एक सदस्य भी वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहे.

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वोटिंग के दौरान के टी एस तुलसी भी अनुपस्थित थे जो नामित सदस्य हैं लेकिन वह विधेयक का विरोध करते रहे थे. विपक्षी दल के सदस्यों की गैर हाजिरी के अलावा अन्नाद्रमुक, बसपा और टीआरएस के सदस्य भी सदन में नहीं थे जिससे सरकार ने ऊपरी सदन में इस विधेयक को पारित करा लिया। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल के पास ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है.

(इनपुट- भाषा से भी)

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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