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नीतीश ने अपनाया हमलावर रुख तो कांग्रेस ने अलापा दोस्ताना राग, कहा - जेडीयू से हमारा कोई मतभेद नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सख्त तेवर को देखते हुए कांग्रेस ने सोमवार को दोस्ताना राग अलापते हुए कहा कि जदयू के साथ हमारा कोई 'मतभेद-दुराव' नहीं है तथा बिहार में गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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नीतीश ने अपनाया हमलावर रुख तो कांग्रेस ने अलापा दोस्ताना राग, कहा - जेडीयू से हमारा कोई मतभेद नहीं

कांग्रेस प्रवकता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बिहार में गठबंधन को कोई खतरा नहीं है और वह चलता रहेगा...

खास बातें

  1. नीतीश कुमार के सख्त तेवर देख कांग्रेस के स्वर नरम
  2. कांग्रेस ने कहा बिहार में गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा
  3. कहा - जेडीयू के साथ मतभेद की बात को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया गया
नई दिल्ली:

राष्ट्रपति चुनाव और जीएसटी के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की एकता से अलग रास्ता चुनने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सख्त तेवर को देखते हुए कांग्रेस ने सोमवार को दोस्ताना राग अलापते हुए कहा कि जदयू के साथ हमारा कोई 'मतभेद-दुराव' नहीं है तथा बिहार में गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आज नीतीश द्वारा विपक्ष के बारे में दिए गए विभिन्न बयानों के बारे में पूछे जाने पर कहा, "राष्ट्रपति चुनाव का मुद्दा अब खत्म हो चुका है. नीतीश के बयान केवल उसी संदर्भ में दिए गए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी कह चुकी हैं कि हर पार्टी को अपने निर्णय लेने के लिए स्वायत्ता है."

बिहार में जदयू एवं राजद के साथ अपने गठबंधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "बिहार में जदयू के साथ हमारे संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बिहार में हमारे गठबंधन को कोई खतरा नहीं है और वह चलता रहेगा." उन्होंने कहा कि जदयू के साथ कांग्रेस के कथित मतभेद की बात को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नीतीश स्वयं कह चुके हैं कि हर पार्टी की अपनी अवधारणा होती है. उन्होंने कहा कि राजनीति में हर पार्टी अपने निर्णय करने के लिए स्वतंत्र है.


गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को ही कांग्रेस को खरी-खरी सुनाते हुए कहा था सिर्फ एकता की बात से काम नहीं चलेगा, पहले एजेंडा बनाए. नीतीश कुमार का बयान मीडिया में आने के बाद कांग्रेस ने अपमान का घूंट पीते हुए हथियार डाल दिए और दोस्ती का राग अलापा. कल यानी रविवार को भी नीतीश कुमार ने कांग्रेस को इशारों में संकेत देते हुए साफ शब्दों में कह दिया था कि वे किसी के पिछलग्गू नहीं हैं.  

नीतीश द्वारा राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार का साथ नहीं देने के अलावा नोटबंदी के मुद्दों पर सरकार का साथ दिये जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव जीत जाने से नोटबंदी का फैसला सही नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि यदि हमने नोटबंदी का विरोध नहीं किया होता तो आज आप कह रहे होते कि आपने विरोध क्यों नहीं किया जबकि इससे इतने अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार बनाये जाने पर नीतीश ने कहा था कि उन्हें हारने के लिए चुनाव में क्यों उतारा गया है.

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नीतीश ने आज विपक्ष की एकता के मुद्दे पर परोक्ष रूप से संकेत करते हुए कहा विपक्ष को अपना वैकल्पिक एजेंडा तय करना चाहिए. वैकल्पिक एजेंडा के आधार पर एकता और गोलबंदी होनी चाहिए तभी वह प्रभावी होगा. सिर्फ चेहरा प्रभावी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि विपक्ष की मजबूती के लिए यह जररी है कि हम अपना एजेंडा तय करें और उस पर काम करें. साथ ही विपक्ष के दायित्वों का भी पालन करें.
(इनपुट भाषा से भी)

 



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