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लाभ का पद मामला : आप के 20 विधायकों के खिलाफ फिर चुनाव आयोग जाएगी कांग्रेस

हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी लाभ के पद के मामले में अयोग्यता रद्द कर दी

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लाभ का पद मामला : आप के 20 विधायकों के खिलाफ फिर चुनाव आयोग जाएगी कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता सुष्मिता देव (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. कांग्रेस ने आप के 20 विधायकों से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने को कहा
  2. कहा- मणिपुर सरकार के ऐसे ही 12 विधायक भी इस्तीफा दें
  3. आप सरकार और मणिपुर का बीजेपी सरकार एक ही सिक्के के दो पहलू
नई दिल्ली: कांग्रेस ने कहा है कि वह लाभ के पद के मामले में 20 आप विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में फिर से लड़ेगी. दिल्ली हाई कोर्ट ने अयोग्य ठहराए गए विधायकों को राहत दी है और चुनाव आयोग को इस मामले को फिर से सुनने के लिए कहा है.

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों के बारे में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने मांग की कि आप के 20 विधायकों तथा बीजेपी नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के ऐसे ही 12 विधायकों को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.

हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी लाभ के पद के मामले में अयोग्यता रद्द कर दी है. कोर्ट ने चुनाव आयोग से मामले पर नए सिरे से सुनवाई करने को कहा है.

यह भी पढ़ें: लाभ के पद का मामला: AAP के 20 विधायकों को दिल्ली HC से राहत, अयोग्यता का फैसला रद्द

कांग्रेस की प्रवक्ता सुष्मिता देव ने कहा कि हम इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं जो प्राकृतिक न्याय के अनुरूप है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार और मणिपुर में बीजेपी सरकार ‘एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.’ सुष्मिता ने कहा कि जिस प्रकार तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लाभ के पद का विवाद उत्पन्न होने पर अपनी संसद सदस्यता से त्यागपत्र देकर फिर से चुनाव लड़ा था, उसी प्रकार आप के इन 20 विधायकों को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ना चाहिए.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मणिपुर में बीजेपी नीत सरकार ने भी इसी तरह संवैधानिक प्रावधानों एवं कानून का घोर उल्लंघन करते हुए 12 संसदीय सचिव बना रखे हैं. इनमें से आठ भाजपा, तीन एनपीएफ और एक निर्दलीय विधायक है. कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 26 जुलाई 2017 में बिमलांगशु राय बनाम असम राज्य मामले में दिए गए फैसले में कहा कि इस तरह के कानून बनाने वाले व्यक्तियों को संसदीय सचिव बनाना विधायी दक्षता के विरुद्ध होगा परिणामस्वरूप इस प्रकार का पद रखने वाले व्यक्ति को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए. सुष्मिता ने कहा कि इसके बावजूद मणिपुर में 12 विधायक संसदीय सचिव बने हुए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने मणिपुर में राजनीतिक अवसरवाद एवं कानून का उल्लंघन करते हुए सरकार बनाने के लिए पेश किए गए दावे में जिन विधायकों का नाम रखा, उनमें एक कांग्रेस का विधायक टीएच श्याम कुमार भी थे. उन्होंने कहा कि बाद में इस विधायक को राज्य मंत्री मंडल में मंत्री बनाकर पुरस्कृत किया गया.

सुष्मिता के साथ मौजूद मणिपुर के पूर्व उप मुख्यमंत्री गाइखानखम ने संवाददाताओं को बताया कि कांग्रेस ने इस विधायक की सदस्यता को दल बदल कानून के तहत रद्द करने के बारे में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष एवं राज्यपाल से मांग की थी जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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VIDEO : आम आदमी पार्टी को मिली राहत

इस बीच कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अजय माकन ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर ट्वीट कर कहा, ‘‘हम इसे चुनाव आयोग में फिर से निबटेंगे क्योंकि इन 20 विधायकों ने भत्तों को लिया था. उच्च न्यायालय ने इससे इनकार या विरोध नहीं किया है. उच्च न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग से महज यह कहा है कि प्राकृतिक न्याय की रोशनी में इसे फिर से देखा जाए.’’


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