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कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला: नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला, प्रधानमंत्री गलती स्वीकारें

आज नोटबंदी को हुए दो साल हो गए. नोटबंदी के फैसले के खिलाफ आज भी कांग्रेस पहले की तरह ही हमलावर है.

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कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला: नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला, प्रधानमंत्री गलती स्वीकारें

नोटबंदी को लेकर सरकार पर हमला बोलते कांग्रेस नेता आनंद शर्मा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आज नोटबंदी को हुए दो साल हो गए. नोटबंदी के फैसले के खिलाफ आज भी कांग्रेस पहले की तरह ही हमलावर है. नोटबंदी के दो साल को कांग्रेस बरसी और काला दिन के रूप में मना रही है. कांग्रेस ने नोटबंदी के दो साल पूरा होने के मौके पर बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला और दावा किया कि आठ नवंबर, 2016 को उठाया गया कदम ‘आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला' है. कांग्रेस ने यह भी कहा कि अब नोटबंदी की जवाबदेही सुनिश्चित करने का समय आ गया है और प्रधानमंत्री को जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. 

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्त रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘नोटबंदी आज़ादी के बाद सबसे बड़ा घोटाला है. नोटबंदी से कालाधन रखने वालों की हुई ऐश, रातों रात ‘सफेद' बनाया सारा कैश! न काला धन मिला, ना नक़ली नोट पकड़े गए, ना ही आतंकवाद व नक्सलवाद पर लगाम लगी.' उन्होंने कहा, ‘120 लोग मारे गए, अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान, लाखों नौकरियां गईं. मोदी जी, देशवासियों को अब तक ‘अर्थव्यवस्था तहस-नहस दिवस' यानी नोटबंदी की दूसरी बरसी की बधाई नहीं दी? कोई विज्ञापन भी नहीं? आप भूल गए होंगे लेकिन देशवासियों को याद है। तैयार रहिए, पश्चात्ताप का समय अब दूर नहीं.'    

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रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘जनता नोटबंदी का बदला भाजपा के ख़िलाफ़ वोट की चोट से लेगी. वक़्त आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी इस तबाही की ज़िम्मेदारी लें, जिसके कारण आम जनता ने लगातार दर्द सहा. वक़्त आ गया है नोटबंदी की जवाबदेही सुनिश्चित करने का. वक़्त आ गया है नोटबंदी घोटाले की जांच का, ताकि दोषी पकड़े जाएं देश कभी नहीं भूलेगा.' 

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​वहीं, मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि आज नोटबंदी की दूसरी बरसी, क्या आज भी पीएम मोदी अपनी गलती मानेंगे? उन्होंने कहा कि नोटबंदी की वजह से लाइन में लगने के कारण 143 लोगों की जान चली गई. नोटबंदी से सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को हुआ. 

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि दो साल पहले 86 फीसदी नोटों को बंद कर दिया था. कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नक़ली नोट पर क़ाबू ये चार मक़सद बताए थे, चारों में कोई पूरा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि साढ़े 6 लाख गांव, महज़ 1 लाख 43 हज़ार बैंक, महज़ दो लाख ATM, लोग बेहाल हो गए. बता दें कि 29 अगस्त को RBI ने कहा था कि 99.3 फीसदी नोट वापस आ गए.  

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आनंद शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी निर्लज्ज होकर सवाल उठा रही है. वित्त मंत्री अरुण जेटली को इस बहस में नहीं पड़ना चाहिए. उनसे तो पूछा ही नहीं गया था नोटबंदी से पहले. ज़िम्मेदारी पीएम की है. वित्त मंत्री इस बहस में क्यों उलझ जाते हैं. अब आरबीआई से पैसा पूछने की कोशिश कर रही है. 

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दरअसल, आठ नवंबर का दिन देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक खास दिन के तौर पर दर्ज है. ठीक दो बरस पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर को रात आठ बजे दूरदर्शन के जरिए देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया था. नोटबंदी की यह घोषणा उसी दिन आधी रात से लागू हो गई. इससे कुछ दिन देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी-लंबी कतारें नजर आईं. बाद में 500 और 2000 रुपए के नये नोट जारी किए गए. 

 
 


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