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गोडसे के मंदिर निर्माण पर कांग्रेस का हल्लाबोल, पूरे प्रदेश में मौन धारण कर किया विरोध-प्रदर्शन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले गोडसे का मंदिर बनाने के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को पूरे प्रदेश में मौन धरना कर अपना विरोध जाहिर किया.

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गोडसे के मंदिर निर्माण पर कांग्रेस का हल्लाबोल, पूरे प्रदेश में मौन धारण कर किया विरोध-प्रदर्शन

ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. ग्वालियर में गोडसे के मंदिर पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
  2. कांग्रेस ने दिन भर मौन धारण कर विरोध-प्रदर्शन किया.
  3. गोडसे की मूर्ति हटवाने की मांग कर रही है कांग्रेस.
भोपाल: ग्वालियर में हिंदू महासभा ने नाथूराम गोडसे का मंदिर बनवा दिया, जिसके खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले गोडसे का मंदिर बनाने के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को पूरे प्रदेश में मौन धरना कर अपना विरोध जाहिर किया. राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश में कई जगह महात्मा की मूर्ति को धोया गया, फूल माला पहनाई गई.

बता दें कि ग्वालियर में हिन्दूसभा भवन में नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाई गई है. शहर के दौलतगंज इलाके में 80 सालों से महासभा का दफ्तर है, जहां गोडसे ने 1947 में 7 दिन बिताए थे. महासभा ने गोडसे के मंदिर के लिये जमीन और अनुमति मांगी थी लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया. मंदिर बनने के बाद महासभा को कारण बताओ नोटिस जारी कर सवाल भी पूछे गये.

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मगर कांग्रेस इसे महज दिखावा भर मान रही है. कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में बापू की मूर्ति के पास मौन में बैठे रहे और ये मांग की कि अगर गोडसे की मूर्ति नहीं हटाई गई तो कांग्रेस का ये आंदोलन और तेज हो जाएगा. कांग्रेस के प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा सरकार गांधीजी का महिमामंडन करने की बात करती है, लेकिन मुरैना में उनकी मूर्ति जलाई गई. उनका अपमान हो रहा है और वो मौन हैं. अगर मूर्ति नहीं हटाई गई, तो कांग्रेस संघर्ष करते हुए सड़क पर उतरेगी.

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उधर बीजेपी ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी करार दिया है. पार्टी प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी ने कहा कि कांग्रेस ना गांधी को मानती है, ना गांधी की मानती है. रहा सवाल मूर्ति विवाद को लेकर तो इस देश में रावण की मूर्ति है, डकैतों की भी मूर्ति है. जब सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की अभिव्यक्ति होती है तब आप नियम लागू कर सकते हो लेकिन जब निजी रूप से होती है, संस्थाएं अपना निर्णय लेती हैं तो उनको अपने विवेक पर छोड़ देना चाहिये.       

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