Coronavirus Outbreak: मालदीव में फंसे भारतीय लोगों को वापस लाने के लिए INS जलाश्‍व माले पहुंचा

विदेशों में फंसे भारतीयों को निकलने के लिये नौसेना ने 'ऑपरेशन समुद्र सेतु' लांच किया है. इस काम के लिए फिलहाल दो युद्धपोत को तैनात किया गया है ले.

Coronavirus Outbreak: मालदीव में फंसे भारतीय लोगों को वापस लाने के लिए INS जलाश्‍व माले पहुंचा

फंसे भारतीयों को लाने के लिए आईएनएस जलाश्‍व माले पहुंच गया है

नई दिल्ली:

Coronavirus Outbreak: कोरोना वायरस की वजह से मालदीव में फंसे भारतीयों (Stranded Indians) को लाने के लिये नौसेना का युद्धपोत आईएनएस जलाश्व (INS Jalashwa) माले पहुंच गया है, वहीं दूसरा युद्धपोत आईएनएस मगर भी माले के रास्ते मे है. आईएनएस जलाश्व के शुक्रवार शाम तक करीब 750 लोगो को लेकर कोच्चि के लिए रवाना होने की उम्‍मीद है. इसके बाद आईएनएस मगर करीब 250 लोगों को लेकर देश लौटेगा. सोशल डिस्टेंसिग और मेडिकल सुविधा की वजह से पहली खेप में नौसेना केवल 1000 लोगो को माले से लेकर आएगी. वैसे मालदीव में करीब 3500 भारतीय लोग फंसे हुए हैं.

गौरतलब है कि विदेशों में फंसे भारतीयों को निकलने के लिये नौसेना ने 'ऑपरेशन समुद्र सेतु' लांच किया है. इस काम के लिए फिलहाल दो युद्धपोत को तैनात किया गया है लेकिन नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने NDTV इंडिया को कहा कि हमारे युद्धपोत तैयार हैं जब भी सरकार कहेगी हम अपने लोगो को लाने के और भी युद्धपोत भेजेंगे और फंसे लोगों को सुरक्षित लेकर आएंगे. नौसेना का हर काम देश के नाम है. ऐसे समय जब देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ाया जा चुका है, सरकार का ध्‍यान दूसरे राज्‍यों में फंसे मजदूरों और विेदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने पर टिका है. विशेष ट्रेनों की व्‍यवस्‍था करके बड़ी संख्‍या में प्रवासी मजदूरों का उनके घर पहुंचाया जा रहा है. विशेष फ्लाइटस के जरिये विदेशों में फंसे भारतीयों को भी जल्‍द ही वापस लाया जाएगा, इसी कड़ी में मालदीप में फंसे भारतीयों को नौसेना के युद्धपोत के जरिये वापस लाया जा रहा है.

इस बीच, देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के केस बढ़कर 53 हजार के करीब पहुंच गए है. देश में जारी लॉकडाउन (COVID-19 Lockdown) के बावजूद संक्रमितों का आंकड़ा 52952 तक पहुंच गया है. बीते तीन दिन में ही कोरोना के 10 हजार मामले दर्ज किए गए हैं. 24 घंटों की बात करें तो कोरोना के 3561 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 89 की मौत हुई.

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