Coronavirus Pandemic: लॉकडाउन के बाद 6 राज्‍यों में वर्कर्स को कुछ अधिक घंटों की शिफ्ट में करना होगा काम

कम से कम छह राज्‍यों ने मौजूदा रोजाना काम के घंटे मौजूदा आठ घंटे से 12 घंटे प्रतिदिन करने का कानून पारित किया है. सरकारों के अनुसार, इसके पीछे का उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां कम शिफ्ट में और कम कामगारों/श्रमिकों के साथ अपना टारगेट हासिल कर सकें.

Coronavirus Pandemic: लॉकडाउन के बाद 6 राज्‍यों में वर्कर्स को कुछ अधिक घंटों की शिफ्ट में करना होगा काम

छह राज्‍यों ने तीन माह तक काम की शिफ्ट बढ़ाने की बात कही है

नई दिल्ली:

Coronavirus Pandemic: ऐसे समय जब कोरोना वायरस के कारण देशव्‍यापी लॉकडाउन का दूसरा चरण खत्‍म होने को है, लाखों की संख्‍या में कामगारों (Workers) को अब अधिक लंबी शिफ्ट  में काम करना पड़ सकता है. कम से कम छह राज्‍यों ने मौजूदा रोजाना काम के घंटे मौजूदा आठ घंटे से 12 घंटे प्रतिदिन करने का कानून पारित किया है. सरकारों के अनुसार, इसके पीछे का उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां कम शिफ्ट में और कम कामगारों/श्रमिकों के साथ टारगेट हासिल कर सकें.

राजस्थान सरकार ने 11 अप्रैल को तीन महीने के लिए काम के घंटे बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी. उसका कहना है कि इससे कंपनियां 33 प्रतिशत की कम क्षमता के साथ भी छह दिन तक अपने काम को अंजाम दे पाएंगी. इस तरह का नियम पारित करने वाले अन्य राज्यों में गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या कर्मचारियों को अतिरिक्त घंटों के लिए मुआवजा दिया जाएगा. राजस्थान के नियमों के अनुसार, अतिरिक्त चार घंटे को ओवरटाइम के रूप में काउंट किया जाएगा.

दूसरी ओर, 17 अप्रैल को इस बारे में गाइडलाइंस जारी करने वाली गुजरात सरकार ने कहा है कि अतिरिक्त घंटों के लिए मजदूरी, मौजूदा मजदूरी के अनुपात में होगी. नियम यह भी कहते हैं कि श्रमिकों को छह घंटे के बाद छुट्टी दी जानी चाहिए लेकिन लॉकडाउन से तगड़ी चोट खाए कई व्यवसायों ने पूर्ण या आंशिक रूप से मजदूरी का भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की है।दिल्‍ली स्थित श्रमिकों कें संगठन, वर्किंग पीपुल्स 'चार्टर के समन्वयक चंदन कुमार ने कहा, "आठ घंटे की शिफ्ट को मजदूर वर्ग के आंदोलनों के लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया गया था और इसे सरकारों द्वारा मनमाने ढंग से नहीं बदला जा सकता. यह बदलाव गैरकानूनी है और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

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