सिर्फ 15 दिन में बढ़ गए COVID-19 के एक लाख मरीज़, कोरोना से जीतने वाले भी एक लाख के पार

देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. हर रोज कोरोनावायरस के संक्रमित मरीजों का ग्राफ रफ्तार पकड़ रहा है. कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 207,615 पर पहुंच गया है.

सिर्फ 15 दिन में बढ़ गए COVID-19 के एक लाख मरीज़, कोरोना से जीतने वाले भी एक लाख के पार

कोरोना से अब तक एक लाख से ज्यादा मरीज़ ठीक हुए (फाइल फोटो)

खास बातें

  • देश में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले 2,00,000 के ऊपर
  • बीते 24 घंटे में सामने आए 8909 नए मामले, 217 की मौत
  • अब तक एक लाख से ज्यादा लोग हुए वायरस से ठीक
नई दिल्ली:

देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. हर रोज कोरोनावायरस के संक्रमित मरीजों का ग्राफ रफ्तार पकड़ रहा है. कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 207,615 पर पहुंच गया है. बीते कुछ दिनों में कोरोना के नए मामलों में काफी तेजी आई है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में कोरोना का शुरुआती 1 लाख आंकड़ा पहुंचने में 110 दिन लगे, लेकिन अब महज 15 दिन में ये आंकड़े 2 लाख से ऊपर पहुंच गया. हालांकि इस बीच राहत की खबर यह है कि देश में कोरोनावायरस से अब तक एक लाख से ज्यादा मरीज़ ठीक हो चुके हैं. बुधवार को जारी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में COVID-19 से ठीक हुए मरीज़ों की संख्या 1,00,303 हो गई है. 

इस बीच, सरकार का कहना है कि भारत कोरोना से लड़ाई के मामले में अन्य देशों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है. कोरोना मामलों में तेज वृद्धि के बीच केंद्र ने मंगलवार को कहा कि भारत इस बीमारी के चरम बिंदु से बहुत दूर है और रोकथाम के लिए किए गए उसके उपाय "बहुत प्रभावी" रहे हैं. सरकार ने कहा कि वह अन्य देशों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कोविड-19 स्थिति पर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि सिर्फ मामलों की कुल संख्या और भारत के सातवें स्थान पर पहुंचने पर ही ध्यान देना गलत है. देशों की आबादी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि करीब 14 देश जिनकी कुल आबादी भारत के बराबर है, वहां कोरोना वायरस के कारण हुई मौतें 55.2 गुना अधिक हैं. अग्रवाल ने कहा ‘‘कोविड-19 के मामले में हमारी मृत्यु दर 2.82 प्रतिशत और यह दुनिया में सबसे कम है जबकि वैश्विक मृत्यु दर 6.13 प्रतिशत है. हम मामलों की समय पर पहचान और उचित नैदानिक ​​प्रबंधन के कारण इसे हासिल कर पाए हैं.'' 

उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 के मामलों में भारत में मृत्यु दर प्रति लाख जनसंख्या पर 0.41 प्रतिशत है जबकि वैश्विक स्तर पर यह 4.9 प्रतिशत है और यह दुनिया में सबसे कम है. उन्होंने कहा कि भारत में होने वाली हर दो कोविड​​-19 मौतों में से एक वरिष्ठ नागरिकों की है जो कुल आबादी का 10 प्रतिशत हैं. इसके साथ ही देश में कोविड​​-19 से हुई मौतों में 73 प्रतिशत लोग पहले से ही गंभीर रोग से पीड़ित थे. अग्रवाल ने कहा कि यह जरूरी है कि अधिक जोखिम वाले लोग आवश्यक एहतियात बरतें और कोविड​​-19 के लक्षणों का अनुभव होने पर समय से चिकित्सा सलाह लें. 

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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत सामुदायिक संक्रमण के चरण में प्रवेश कर गया है, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) वैज्ञानिक निवेदिता गुप्ता ने कहा कि सामुदायिक प्रसार शब्द के उपयोग के बजाय, रोग के प्रसार की सीमा को समझना महत्वपूर्ण है और हम अन्य देशों की तुलना में कहां खड़े हैं. यह पूछे जाने पर कि बीमारी कब चरम बिंदु पर पहुंच जाएगी, गुप्ता ने कहा कि हम उस स्थिति से बहुत दूर हैं. बीमारी पर काबू के लिए हमारे निवारक उपाय बहुत प्रभावी रहे हैं और हम अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं. 

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