नई निर्माण और बिजली कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में छूट उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ा ऐलान

उद्योगों को आम बजट से इससे ज़्याद की उम्मीद थी, जानकार मानते हैं कि कई वजहों से यह बजट रास नहीं आ रहा

नई निर्माण और बिजली कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में छूट उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ा ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश किया.

नई दिल्ली:

वित्त मंत्री के बजट में नई निर्माण और बिजली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में छूट का ऐलान शायद उद्योगों के लिए सबसे बड़ा ऐलान रहा. वित्त मंत्री का कहना है, कि उन्होंने अपना राजस्व घटाकर यह फैसला किया है. लेकिन उद्योगों को शायद इससे ज़्याद की उम्मीद थी. जानकार मानते हैं कि कई वजहों से ये बजट उन्हें रास नहीं आ रहा.

बजट में अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग से ऐलान नहीं हैं. मसलन ऑटो सेक्टर या दूसरे सेक्टरों को राहत की जो उम्मीद थी, वो नहीं मिली. आयकर की जो नई दरें आईं, उनको लेकर जानकर बता रहे हैं कि उसके लिए सारी छूटें छोड़नी होंगी. यानी पुराने टैक्स सिस्टम में मेडीक्लेम, एलआईसी आदि से जो छूट मिलती थी, वो खत्म हो जाएगी. लांग टर्म कैपिटल गेन्स को लेकर भी बजट में कोई घोषणा नहीं है. डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स में छूट तो मिली लेकिन वो अंशधारकों पर डाल दी गई. यानी वो उनके इनकम टैक्स का हिस्सा हो जाएगी.

रसना के एमडी पिरयूज खंभात ने कहा कि कल से इकॉनामी 7% पर ग्रो करेगी ऐसा नहीं है. थोड़ा इन्फ्लेशन बढ़ेगा क्योंकि फिस्कल डेफिसिट 0.5% बढ़ा है. इनकम टैक्स घटाया है लेकिन 70 कर छूट खत्म भी की हैं. इसका इकॉनामी पर क्या असर होगा देखना होगा."

मेदांता के डॉ नरेश त्रेहन ने कहा कि हेल्थ पर बजट अलोकेशन 63000 से बढ़कर 69,000 करोड़ किया है. लेकिन ये फिर भी काफ़ी कम है. सरकार का टारगेट रहा है कि हेल्थ बजट जीडीपी का 2.5% हो...सीजीएचएस में भी सरकार का काफ़ी पेमेंट बाकी है.

स्पाइस जेट के सीईओ अजय सिंह ने कहा कि  "उड़ान स्कीम के तहत 50 नए एयरपोर्ट डेवलप किए गए हैं. बजट में 100 नए एयरपोर्ट डेवलप करने का प्रपोज़ल बहुत बड़ी बात है. इनकम टैक्स रेट घटने से आशा है कि इसका सिविल एविएशन सेक्टर पर अच्छा असर पड़ेगा."

बेशक बुनियादी क्षेत्र में निर्माण के कुछ बड़े फैसलों से उम्मीद है. 6000 किलोमीटर का हाईवे बनाने के अलावा 100 हवाई अड्डे बनाने का फ़ैसला भी इसमें शामिल है. इसके अलावा स्टार्ट अप कंपनियों की कारोबारी सीमा का दायरा बढ़ाना हो या फिर छोटे और मझोले उद्योगों के क़र्ज़ की अलग व्यवस्था का ऐलान, इनमें सीधी राहत के वो ऐलान नहीं हैं जिनका उद्योग जगत को इंतज़ार था. शेयर बाज़ार फिर किस बात पर उछलता.

 
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