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क्रीम लगा कर भी गोरे नहीं हुए तो इसमें कोर्ट क्या करेगी - सुप्रीम कोर्ट

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क्रीम लगा कर भी गोरे नहीं हुए तो इसमें कोर्ट क्या करेगी - सुप्रीम कोर्ट

'कल लोग ये कहते कोर्ट आ जाएंगे की बाल उगाने वाले तेल से उनके बाल नहीं आएं' - मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई थी कि कॉस्मैटिक्स सर्जरी और शरीर के अंगों को सुंदर बनाने का दावा करने वाले उत्पादों को लेकर न्यायालय कोई दिशा निर्देश जारी करे।

डॉक्टर चंद्र लेखा ने याचिका दाखिल कर कहा था कि बहुत सारी कंपनियां और अस्पताल लोगों को सुंदर बनाने का दावा कर उनसे पैसे ऐंठती है। यही नहीं अस्पतालों में कॉस्मैटिक सर्जरी के नाम पर लोगों को गुमराह किया जाता है। कंपनी अपने समान को बेचने के लिए भ्रामक विज्ञापन देती है जिसके झांसे में लोग आ जाते हैं। अस्पतालों में सर्जरी भी अच्छे डॉक्टर से नहीं की जाती और उपकरण भी घटिया होते हैं। मरीज की हालत ख़राब हो जाती है या फिर बस मुआवज़ा दे दिया जाता है। इस लिए इस मामले में  एक ठोस कानून बनाए जाने की जरूरत है।

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'तेल लगाने से बाल नहीं आए तो...'


मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने एक मशहूर कंपनी की क्रीम का नाम लेकर कहा कि सालों से एक क्रीम आती है जो दावा करती है उसको लगा कर आप गोरे हो जाओगे लेकिन अगर आप गोरे नहीं हुए तो कोर्ट क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी याचिका को कोर्ट सुनने लगा तो कल लोग ये कहते कोर्ट आ जाएंगे की बाल उगाने वाले तेल से उनके बाल नहीं आएं। ऐसे में ये संभव ही नहीं है कि कोर्ट इस पर कोई आदेश जारी करे। कोर्ट एेसे मामलों में गाइडलाइन जारी करने के लिए नहीं बैठा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि एेसे मामलों को लेकर कंज़्यूमर कोर्ट जाया जा सकता है और ये कहते हुए कोर्ट ने याचिका को ख़ारिज कर दिया।



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