COVID-19 : इजराइल ने भारत में गरीब व सुविधाओं से वंचित लोगों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ

भारत में स्थित इजराइल दूतावास ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों में समाज सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर गरीब एवं सुविधाओं से वंचित समुदायों की सहायता के लिए सहयोग किया है.

COVID-19 : इजराइल ने भारत में गरीब व सुविधाओं से वंचित लोगों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ

नई दिल्ली:

भारत में स्थित इजराइल दूतावास ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों में समाज सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर गरीब एवं सुविधाओं से वंचित समुदायों की सहायता के लिए सहयोग किया है. यह सहयोग छोटी-अवधि के सामाजिक प्रोजेक्ट्स के तौर पर किया गया था और भारत-भर में लागू किया गया था. समाज सेवी संस्थाएं जो इस सहयोग के पहले भाग का हिस्सा थीं, वे गुलशन फाउंडेशन, सलाम बालक ट्रस्ट, आरोहन, नोएडा डेफ सोसाइटी, स्माइल फाउंडेशन, कल्चर मांक और नवरत्न फाउंडेशन हैं.

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भारत में इज़राइल के राजदूत रॉन माल्का का कहना है, ''हमें भारत भर में विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं के साथ सहयोग करने और कोविड-19 महामारी के दौरान सुविधाओं से वंचित समुदायों की सहायता करने को लेकर गर्व है. हमें खुशी है कि हम यह सहयोग यहूदियों के पर्व हानूका के दौरान कर पा रहे हैं, जहां हम आठ रातों तक मोमबत्तियां जला कर इसे मनाते हैं. लोगों की जिंदगियों में थोड़ी रोशनी लाकर, हमें आशा है कि हम कोविड-19 द्वारा लाये गए अंधेरे को दूर कर सकेंगे. हममें से हरेक को एक छोटी रोशनी बनने का प्रयास करना चाहिए, और हम मिलकर एक शानदार रोशनी ला सकते हैं.''

इस सहयोग के अंतर्गत, बेघर परिवारों का साप्ताहिक स्वास्थ्य जांच किया गया और उन्हें दवाई और सैनिटाइजेशन किट दिए गए. रोज़ाना मेहनताना कमाने वाले जैसे फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स, मजदूरों और पटरी पर बेचने वालों को मास्क और सैनिटाइजर्स दिए गए.

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दिल्ली में, ड्राइ राशन किट जिसमें चावल, आटा, दाल, तेल और चीनी था, वह गरीबों एवं सुविधाओं से वंचित लोगों के बीच बांटे गये. साथ ही, जिन महिलाओं ने महामारी के दौरान कपड़ा उद्योग में अपनी आजीविका के साधन खो दिए हैं, उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए सिलाई मशीन दिए गए हैं.

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समाज में आर्थिक रूप से कमजोर तपके से आने वाली युवतियों के बीच सैनिट्री नैपकिन बांटे गए. खुद का रोजगार करने वाली महिलाएं जो काम की तलाश में शहर वापस लौट रही थीं, उन्हें हुनर के विकास के लिए प्रशिक्षण और पर्सनल प्रोटेक्टिव एक्विपमेंट (पीपीई) किट दिए गए. पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को मुर्गी पालन के बारे में प्रशिक्षण दिया गया ताकि वो स्वयं अपनी आमदनी अर्जित कर सकें. उन बहरे बच्चों एवं युवाओं के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित किए गए थे, जिनके परिवार उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे.