कोविड-19 के कारण दो माह से कोई आमदनी नहीं, सब्‍जी बेचने को मजबूर है दिल्‍ली का टीचर

दिल्ली सरकार के 5 मई के आदेश के अनुसार, सभी 'अतिथि' शिक्षकों को 8 मई, 2020 तक के लिए भुगतान किया जाएगा और गर्मियों की छुट्टियों में केवल तभी भुगतान किया जाएगा, जब उन्हें ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है."

कोविड-19 के कारण दो माह से कोई आमदनी नहीं, सब्‍जी बेचने को मजबूर है दिल्‍ली का टीचर

वजीर सिंह आर्थिक संकट के चलते सब्‍जी बेचने को मजबूर हैं

नई दिल्ली:

Covid19 Pandemic: देश की राजधानी दिल्ली के एक स्कूल का संविदा शिक्षक कोरोना संकट के बीच काफी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहा है. इस शिक्षक को कथित तौर पर पिछले दो महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. ऐसे में आर्थिक संकट के चलते यह सब्‍जी बेचकर अपनी रोजीरोटी चलाने को मजबूर है. आठ मई से COVID-19 के स्‍कूल बंद होने के कारण सर्वोदय बाल विद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक वजीर सिंह को वेतन नहीं मिल रहा है, ऐेसे में वे सब्‍जी बेचकर अपना और परिवार का खर्च चला रहे हैं.
 
वजीर सिंह ने ANI से कहा, "संविदा शिक्षकों को 8 मई तक भुगतान के दिल्ली सरकार के आदेश के बाद मैं बेरोजगार हूं. हालांकि उन्‍होंने हमें नौकरी को लेकर आश्‍वस्‍त किया है लेकिन मैं सब्जियां बेचने के लिए मजबूर हूं." दिल्ली सरकार के 5 मई के आदेश के अनुसार, सभी 'अतिथि' शिक्षकों को 8 मई, 2020 तक के लिए भुगतान किया जाएगा और गर्मियों की छुट्टियों में केवल तभी भुगतान किया जाएगा, जब उन्हें ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है."हालांकि इससे पहले आम आदमी पार्टी और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से एक ट्वीट में कहा गया था कि दिल्ली सरकार COVID-19 प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, अतिथि शिक्षकों को वेतन का भुगतान करेगी।

छह लोगों के परिवार वाले वजीर सिंह के पास अंग्रेजी में मास्‍टर्स और बीएड की डिग्री है. वे परिवार के एकमात्र रोटी कमाने वाले हैं. उनके माता-पिता  बीमार हैं जबकि भाई-बहन हैं. ऐसे में परिवार का खर्चा चलाने के लिए उन्‍हें काफी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि कोरोना की महामारी ने कई बेरोजगारों को छोड़ दिया है. वजीर ने कहा, "यदि हम आपदा प्रबंधन एक्‍ट (Disaster Management Act) को देखते हैं तो नियोक्ता आपदा के दौरान कर्मचारी को 'निकाल' नहीं सकता है. ऐसे समय जब हम इस विशाल महामारी का सामना कर रहे हैं, मैं भी ऐसा ही अनुभव कर रहा हूं." उन्‍होंने कहा, "हमें काम के लिए बुलाया जाता है और समय-समय पर निकाल दिया जाता है. जब भी कोई नई भर्ती, स्थानांतरण या पदोन्नति होती है, हम अपने कर्तव्यों से मुक्त हो जाते हैं. एक तरह से हर दिन, हम अपनी नौकरी खोने के भय के साथ जीते हैं. यह बहुत अपमानजनक है. वजीर ने कहा, "अनुबंधित शिक्षकों को केवल काम के दिनों के लिए भुगतान किया जाता है. एक व्याख्याता को प्रति दिन 1,445 रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि एक टीजीटी को प्रति दिन 1,403 का भुगतान किया जाता हैण्‍"

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