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भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र करने पर माकपा ने की पीएम मोदी की आलोचना

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भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र करने पर माकपा ने की पीएम मोदी की आलोचना

खास बातें

  1. पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे के 'अंतरराष्ट्रीयकरण' का अवसर मिल जाएगा
  2. कश्मीर हिंसा को महज कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं माना जा सकता
  3. सरकार को कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान ढूंढने के लिए कहा
हैदराबाद:

माकपा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान और गिलगिट में 'मानवाधिकार उल्लंघनों' का जिक्र करने पर उनकी आलोचना की और कहा कि इससे पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे के 'अंतरराष्ट्रीयकरण' का अवसर मिल जाएगा.

माकपा के तेलंगाना राज्य की पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि कश्मीर मुद्दे को महज कानून-व्यवस्था की समस्या के मुद्दे के तौर पर नहीं लिया जा सकता और इसके राजनीतिक समाधान की जरूरत है.

येचुरी ने कहा, 'कल अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान और गिलगिट में मानवाधिकार उल्लंघनों की बात की. हम कहते रहे हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. किसी को भी इसके मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. लेकिन अब हम बलूचिस्तान की बात करने लगे हैं.'

उन्होंने कहा, 'बलूचिस्तान का मुद्दा उठाकर हम पाकिस्तान को अवसर दे रहे हैं. अब पाकिस्तान कह सकता है कि चूंकि भारत बलूचिस्तान की बात करने लगा है तो उन्हें कश्मीर की बात करने का अधिकार है. इस तरह की विदेश नीति के साथ हम दूसरों को कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का अवसर दे रहे हैं.'


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उन्होंने कहा, 'हमने सरकार को कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान ढूंढने के लिए कहा है. हमने सरकार से हिंसा भड़कने के समय भी यही बात कही. हमने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए कहा. इस मुद्दे को महज कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं माना जा सकता.'

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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