क्रेडिट कार्डधारकों को ब्याज पर ब्याज छूट का लाभ न दिया जाए, सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले में की अहम टिप्पणी

केंद्र सरकार ने मार्च से अगस्त 2020 के बीच ग्राहकों को लोन मोरेटोरियम की सुविधा पहले ही दी थी. इस अवधि के ब्याज पर लगने वाले ब्याज (Loan Moratorium) को माफ करने का निर्देश Supreme Court पहले ही दे चुकी है, जिस पर सरकार सहमत हो चुकी है.

क्रेडिट कार्डधारकों को ब्याज पर ब्याज छूट का लाभ न दिया जाए, सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले में की अहम टिप्पणी

Supreme Court कोरोना काल में ब्याज पर ब्याज माफी का दे चुका है आदेश

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium)  मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए कहा है कि क्रेडिट कार्डधारकों को ब्याज पर ब्याज छूट का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए. अदालत ने कहा कि क्रेडिट कार्डधारक कर्जदार नहीं है, वे खरीदारी करते हैं, न कि कोई कर्ज लेते हैं. वहीं सरकार ने कोर्ट से गुहार लगाई कि आगे और किसी राहत की मांग पर विचार न किया जाए, क्योंकि सरकार पहले ही उच्चतम सीमा पर पहुंच चुकी है. सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता ने कहा कि सरकार संकटग्रस्त क्षेत्रों को मदद के लिए हरसंभव मदद देने को तैयार है.

यह भी पढ़ें- CBI जांच के लिए राज्यों की सहमति लेना जरूरी : सुप्रीम कोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले में ब्याज पर ब्याज माफ करने को लेकर अहम सुनवाई की. इसमें सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र के 9 नवंबर के हलफनामे के बारे में जानकारी दी. जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच छह महीने की लोन मोरेटोरियम (कर्ज अदायगी में कुछ वक्त तक छूट) वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है. केंद्र ने मार्च से अगस्त 2020 के बीच ग्राहकों को लोन मोरेटोरियम की सुविधा पहले ही दी थी.

यह भी पढ़ें- अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' मुसीबतों में फंसी, सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर लगी रोक हटाने से इनकार किया

इस अवधि के ब्याज पर लगने वाले ब्याज को माफ करने का निर्देश अदालत पहले ही दे चुकी है, जिस पर केंद्र सरकार भी सहमत हो चुकी है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि सरकार को जल्‍द से जल्‍द ब्‍याज माफी योजना लागू करनी चाहिए. अदालत ने कहा था कि लोगों की दिवाली इस बार सरकार के हाथों में है.

लोन मोरेटोरियम पर एक माह बाद सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम के मामले पर आखिरी सुनवाई 14 अक्टूबर को की थी. इस सुनवाई में SC ने कहा था कि ब्याज पर ब्याज माफी स्कीम को जल्द लागू करना चाहिए. केंद्र ने इसके लिए 15 नवंबर तक का वक्त मांगा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 2 नवंबर तक सर्कुलर जारी करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि जब फैसला हो चुका है तो उसे लागू करने में इतना समय क्यों लगना चाहिए.

राहत के उपायों का ब्योरा रखा
वित्त मंत्रालय और आरबीआई की ओर से किए गए राहत के उपायों का ब्योरा रखा. एसजी मेहता ने बताया कि बिजली, खुदरा, एमएसएमई (MSME) जैसे क्षेत्रों के लिए कर्ज पुनर्गठन और लिक्विडिटी का समाधान दिया गया है. कोरोना के कारण संकटग्रस्त क्षेत्रों को विशिष्ट राहत के लिए विभिन्न क्षेत्रों की ओर से कई याचिकाएं दायर हैं. वित्त मंत्रालय और RBI ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए राहत सुनिश्चित करने के पहले ही कई उपाय किए हैं.

आत्मनिर्भर पैकेज का किया था ऐलान
केंद्र की ओर से घोषित मदद में 20 हजार करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा और बिजली वितरण कंपनियों को 19.8 हजार करोड़ की लिक्विडिटी (पूंजीगत सहायता) शामिल है. केंद्र ने बताया कि रियल एस्टेट सेक्टर को आयकर समेत कई राहत दी गई हैं. एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं. आगे की मदद के लिए और अधिक गुंजाइश नहीं होने के कारण ऋण पुनर्गठन भी किया गया है.

राज्य की सहमति के बिना जांच नहीं कर सकेगी CBI
Newsbeep

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com