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बिहार : बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, निभाया बेटे होने का फर्ज

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बिहार : बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, निभाया बेटे होने का फर्ज

बिहार में बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर मिसाल कायम की है (प्रतीकात्मक चित्र)

खास बातें

  1. मृतक के नहीं था बेटा, बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज
  2. नौ बहनों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर पहुंचाया श्मशान घाट
  3. बेटियों की इस पहल की पूरे बांका जिले में हो रही है चर्चा
पटना: बेटियां किसी भी लिहाज से बेटों से कम नहीं होतीं, फिर चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या कारोबार या फिर सामाजिक जिम्मेदारियों का मामला, हर क्षेत्र में वे पुरुषों से आगे दिखाई देती हैं. यह साबित कर दिखाया बिहार की बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर. नौ बहनों ने जब अपने पिता की अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी तो देखने वालों का आंखें नम हो उठीं.

बिहार के बांका जिले में कटोरिया इलाके में एक करोबारी चुन्नीलाल साह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे. वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. बीते सोमवार को उनका निधन हो गया. व्यवसायी का शव उनके घर लाया गया. वहां जब अंतिम यात्रा के लिए उनकी अर्थी तैयार गई तो बात आई अर्थी को कंधा लगाने की. क्योंकि चुन्नीलाल के कोई बेटा नहीं था, केवल नौ बेटियां हैं. बेटियों ने आगे आकर पिता की अर्थी को कंधा लगाया.

सभी बहनों ने बारी-बारी से कंधा लगाकर पिता के शव को श्मशान घाट तक पहुंचाया. इस घटना को देखकर सभी गम में डूब गए. मौजूद सभी लोग बेटियों की इस पहल की प्रशंसा कर रह हैं कि बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाया है.


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