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POCSO एक्ट में बदलाव के बाद DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने तोड़ा अनशन

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पिछले 9 दिनों से अनशन पर थीं. 

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POCSO एक्ट में बदलाव के बाद DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने तोड़ा अनशन

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया.

खास बातें

  1. पिछले 9 दिनों से थीं अनशन पर
  2. जूस पीकर खत्म किया अनशन
  3. POCSO एक्ट में बदलाव के बाद तोड़ा अनशन
नई दिल्ली: रेप के मामलों में सख्त कानून की मांग को लेकर अनशन पर बैठीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पोक्सो एक्ट में हुए बदलाव के बाद जूस पीकर अपना अनशन खत्म कर दिया है. छोटी बच्चियों से रेप के मामले में फांसी की सज़ा के प्रावधान को कैबिनेट से मंज़ूरी मिल जाने के बाद उन्होंने एक दिन पहले ही अनशन तोड़ने का एलान किया था. उन्होंने कहा था कि अध्यादेश लाया जाएगा ये अच्छी बात है, लेकिन उसको लागू किस तरह से किया जा रहा है ये भी देखना होगा. मालीवाल पिछले 9 दिनों से अनशन पर थीं.

अनशन तोड़ने के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि मैंने अकेले लड़ना शुरू किया था, लेकिन मुझे देश भर के लोगों ने समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह स्वतंत्र भारत में एक ऐतिहासिक जीत है. मैं हर किसी को इस जीत की बधाई देती हूं.

हड़ताल का समापन करते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा, 'हर रोज तीन, चार, छह साल की बच्चियों से नृशंसता के साथ बलात्कार हो रहा है. मैंने पत्र लिखे, नोटिस जारी किये. मैंने नागरिकों द्वारा लिखे गए 5.5 लाख पत्र प्रधानमंत्री को सौंपे, लेकिन सारा व्यर्थ गया.' 

उन्होंने कहा, 'उसके पश्चात मैंने भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया. कोई रणनीति नहीं थी. धीरे-धीरे पूरे देश में लोग इस आंदोलन से जुड़ते गये. उसे इतना बल मिला कि प्रधानमंत्री को भारत लौटने के बाद कानून में संशोधन करना पड़ा. मैं इस जीत के लिए भारत के लोगों को बधाई देते हैं.'  आयोग बलात्कार के मामलों से निबटने के लिए देशभर में त्वरित अदालतों के गठन एवं दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग करता रहा है.

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आपको बता दें कि सरकार ने इस मामले में अध्यादेश लाने का फैसला किया है. पोक्सो एक्ट यानि प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस में ये बदलाव होने से 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के रेप को दोषियों को अधिकतम सज़ा के तौर पर मौत की सज़ा दी जा सकेगी.

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क्या है अध्यादेश में
  1. 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामले में मृत्युदंड का प्रावधान कर दिया है.
  2. और किसी महिला से रेप के मामले में न्यूनतम सज़ा 7 से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है.
  3. अगर पीड़िता की उम्र 16 साल से कम हो तो अग्रिम ज़मानत नहीं मिलेगी.
  4. 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार की न्यूनतम सज़ा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है.
  5. गैंगरेप की सज़ा आजीवन कारावास से मृत्युदंड तक होगी. 
  6. तेज़ी से जांच कराने के लिये २ महीने की समय सीमा तय की है.



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