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देश के दो हजार से ज्यादा IAS-IPS अफसर संपत्तियों का ब्यौरा देने में निकले 'डिफॉल्टर'

देश के दो हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस(IAS & IPS) अपनी संपत्तियों का ब्यौरा(IPR) देने में डिफॉल्टर साबित हुए हैं. वर्ष 2018 का रिटर्न भरने में भी सुस्ती दिख रही है. ऐसे में 31 जनवरी के बाद ऐसे अफसरों की संख्या बढ़ सकती है.

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देश के दो हजार से ज्यादा  IAS-IPS अफसर संपत्तियों का ब्यौरा देने में निकले 'डिफॉल्टर'

फाइल फोटो.

खास बातें

  1. दो हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस छिपा रहे अपनी संपत्ति
  2. समय-सीमा बीत जाने के बाद भी कई वर्ष से नहीं भर रहे रिटर्न
  3. अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को हर साल देना होता है संपत्ति का हिसाब
नई दिल्ली:

देश में तमाम आईएएस-आईपीएस(IAS And IPS Officers) अफसर संपत्तियों का खुलासा करने से बच रहे हैं. संपत्तियों के  हिसाब-किताब से जुड़ा  Immovable Property returns ही नहीं भर रहे हैं.अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं(Indian Administrative Service) के अफसरों के लिए हर साल रिटर्न भरने का सख्त नियम है. जमीन,जायदाद और मकान आदि से जुड़े इस अचल संपत्ति रिटर्न को भरने में फेल होने पर विजलेंस क्लीयरेंस और प्रमोशन आदि के लाभ से वंचित करने की चेतावनियों को भी अफसर दरकिनार कर दे रहे. वर्ष 2018 के लिए इम्मूवेबल प्रॉपर्टीज (अचल संपत्तियों) रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जनवरी है. मगर अब तक साढ़े पांच हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस अफसरों ने रिटर्न नहीं भरे हैं. जबकि अब सिर्फ दस दिन है. हालांकि, ये अफसर अभी रिटर्न जमा कर खुद को डिफॉल्टर घोषित होने से बचा सकते हैं. मगर दो हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस तो ऐसे हैं, जिन्होंने 2014 से लेकर 2017 तक के रिटर्न भी नहीं भरे हैं.

एक प्रकार से डीओपीटी के नियमों के अनुसार इन अफसरों पर डिफॉल्टर होने का  ठप्पा लग चुका हैं. यूपी में अवैध खनन के मामले में चर्चित आईएएस अफसर बी चंद्रकला के ठिकानों पर जिस तरह से छापेमारी हुई तो अफसरों की काली कमाई का मामला फिर से बहस में आ गया है. ऐसे में एनडीटीवी ने जब केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में देश भर के आईएएस-आईपीएस अफसरों की ओर से दाखिल IPR के आंकड़ों का परीक्षण किया तो पता चला कि तमाम अफसर नियम-कायदों को दरकिनार कर अपनी संपत्तियों का खुलासा करने से बच रहे हैं. 


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आईएएस अफसर कई साल से कर रहे आनाकानी
31 दिसंबर 2018 तक अर्जित अचल संपत्तियों के बारे में एक जनवरी से 31 जनवरी 2019 तक आईएएस अफसरों को हिसाब-किताब देना है. सिर्फ दस दिन बचे हैं, मगर अब तक तकरीबन पांच हजार आईएएस में से 3060 अफसरों ने रिटर्न नहीं दाखिल किए हैं. खैर, इन आईएएस अफसरों के पास तो अभी दस दिन का मौका है. अगर तय तिथि के भीतर नहीं जमा करेंगे तो एक और मौका मिलेगा. इसके बाद डिफॉल्टर घोषित होंगे. मगर देश में सैकड़ों की संख्या में ऐसे आईएएस पड़े हैं, जो कि वर्ष 2014 से लेकर अपनी संपत्तियों की घोषणा नहीं कर रहे हैं. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग(डीओपीटी) के निर्धारित प्रोफार्मा पर वह सूचनाएं ही नहीं उपलब्ध करा रहे हैं.

DOPT से मिले आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 में अर्जित संपत्तियों का 1164 आईएएस अफसरों ने रिटर्न ही नहीं दाखिल किया. इसके अलावा 2015 का 1137 आईएएस ने ब्यौरा नहीं दिया. इस बीच सरकार ने कुछ सख्ती बरती तो सुस्त पड़े आईएएस अफसरों ने प्रापर्टीज की जानकारी देनी शुरू की. फिर भी 592 आईएएस डिफॉल्टर रहे. इसी तरह 2017 के लिए 715 अफसरों ने संपत्तियों की जानकारी नहीं दी. इसमें यूपी के 86 आईएएस हैं. देश में 6396 पदों की तुलना में 4926 आईएएस कार्यरत हैं. 

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आईपीएस अफसरों का क्या है हाल
देश में आईपीएस अफसरों के कुल 4802 आईपीएस अफसरों की पोस्ट है. जिसमें से 3894 आईपीएस कार्यरत हैं. अचल संपत्ति का रिटर्न भरने की बात करें तो वर्ष 2018 की अचल संपत्ति का ब्यौरा अब तक 2696 आईपीएस नहीं दिए हैं. इनके लिए 31 जनवरी आखिरी तारीख है. चौंकाने वाली बात है कि सैकड़ों की संख्या में ऐसे आईपीएस हैं, जिन्होंने पिछले दो-तीन वर्षों से ही संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है. मिसाल के तौर पर 31 दिसंबर 2017 तक अर्जित संपत्तियों के बारे में 498 आईपीएस अफसरों ने अगले साल 31 जनवरी 2018 की मियाद बीत जाने के बाद भी जानकारी नहीं दी. इसमें यूपी के 53, उत्तराखंड के आठ, राजस्थान के नौ, पंजाब के 12, मध्य प्रदेश के 20 अफसर हैं. इसी तरह करीब छह सौ आईपीएस अफसर ऐसे हैं, जिन्होंने वर्ष 2016 की संपत्तियों का भी ब्यौरा नहीं दिया. इसी तरह वर्ष 2018 का रिटर्न अब तक 2678 आईपीएस नहीं भरे हैं. हालांकि, वर्ष 2018 के रिटर्न के लिए अभी 31 जनवरी तक का टाइम है. 

सख्त नियम, फिर भी कैसे बच रहे अफसर
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968  के नियम 16(2) के तहत हर आईएएस-आईपीएस अफसर को अचल संपत्तियों यानी जमीन-जायदाद, मकान आदि के बारे में सूचनाएं देनी होती हैं. जिसे Immovable Property Return (IPRs) कहते हैं. पिछले साल का ब्योरा अगले साल की 31 जनवरी तक जमा करना होता है. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में 29 अक्टूबर 2007 को एक गाइडलाइंस जारी कर रखी है. जो अफसरों के विजिलेंस क्लीयरेंस पर है. इसके मुताबिक यदि कोई अफसर आईपीआर भरने में फेल होताहै तो उसके विजिलेंस क्लीयरेंस को निरस्त किया जा सकता है.  उनके प्रमोशन और विदेशों में पोस्टिंग के लिए जरूरी विजिलेंस क्लियरेंस को भी रोक दिया जा सकता है. फिर भी बड़ी संख्या में आईएएस-आईपीएस अफसरों के रिटर्न न भरने पर भी उनके ठसक के साथ नौकरी करने पर सवाल उठ रहे हैं.

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वीडियो- आईएएस चंद्रकला को ईडी का नोटिस 


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