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अटके रक्षा संबंधी मामलों को जल्द पूरा करने के लक्ष्य के साथ रक्षा मंत्री ने सेना प्रमुखों संग की बैठक 

देश की नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के साथ रोजाना होने वाली बैठक आज से शुरू हो गई.

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अटके रक्षा संबंधी मामलों को जल्द पूरा करने के लक्ष्य के साथ रक्षा मंत्री ने सेना प्रमुखों संग की बैठक 

सेना प्रमुखों के साथ बैठक के दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण.

खास बातें

  1. सेना प्रमुखों संग बैठक पहले सप्ताह में एक बार होती थी
  2. रक्षा खरीद परिषद की बैठक भी हर 15 दिन में होगी
  3. देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री हैं निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली: देश की नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के साथ रोजाना होने वाली बैठक आज से शुरू हो गई. पहली बैठक में थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा और वायुसेना के सह वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एसबी देव शामिल हुए. वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोवा दिल्ली में नही थे तो उनकी जगह वायुसेना के सह वायुसेना प्रमुख मीटिंग में शामिल हुए. 

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रक्षा खरीद परिषद की बैठक भी हर 15 दिन में
निर्मला सीतारमण ने तीनों चीफ के साथ रोजाना बैठक करने का यह फैसला अटके पड़े रक्षा संबंधी मामलों का तेज़ी से निपटारा करने के लिए लिया है. इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने रक्षा खरीद परिषद यानि की डीएसी की बैठक में भी 15 दिन में एक बार बुलाने का फैसला किया है ताकि कामकाज निश्चित समय में पूरी हो सके. इससे पहले रक्षा मंत्री के साथ सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों की बैठक हर सप्ताह में एक बार हुआ करती थी. अब यह बैठक रोजाना हुआ करेगी.

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देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षामंत्री
निर्मला सीतारमण ने 7 सितंबर को ही रक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण किया है. आजादी के बाद देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी महिला ने पूर्णकालिक रक्षा मंत्री का पद संभाला है. निर्मला सीतारमण ने मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के साथ बैठक में यह फैसला लिया है कि रक्षा अधिग्रहण में तेज़ी लाई जाए जाए. इससे आने वाली चुनौतियों से निपटने में देर नहीं होगी. नई रक्षा मंत्री की कोशिश होगी की लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा जाए.

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इसके लिए रक्षा मंत्री की ही अध्यक्षता में होने वाली रक्षा खरीद परिषद की बैठक को भी अब 15 दिन में एक बार बुलाने का फैसला किया गया है. इसमें रक्षा मंत्री के अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और दूसरे अधिकारी होते हैं. इसी रक्षा खरीद परिषद बैठक में नए हथियारों के खरीद को लेकर फैसला लिया जाता है. इसके बाद ये अपनी सिफरिश देते हैं फिर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्यूरिटी इसपर अंतिम फैसला लेती है. 


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