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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने मंत्री के बचाव में उतरे, बोले- डटे रहना, टूटना मत

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने मंत्री के बचाव में उतरे, बोले- डटे रहना, टूटना मत

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (File photo)

खास बातें

  1. सत्येंद्र जैन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच
  2. सतेंद्र जैन खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं
  3. हवाला कारोबारियों से कोई नाता नहीं था
नई दिल्ली:

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी हो रही हैं. एमसीडी चुनावों से ठीक पहले सीबीआई ने दिल्ली के स्वास्थ्‍य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक प्राथमिक जांच दर्ज कर ली है. इस मामले को लेकर अरविंद केजरीवाल अपने मंत्री के बचाव में उतरे हैं. उन्होंने ट्वीट किया है कि आपने कई बड़े माफ़िया से पंगा लिया है. आपको तोड़ने के लिए CBI जैसे सब हथियार इस्तेमाल करेंगे. डटे रहना. टूटना मत. ईश्वर आपके साथ है.

वैसे सतेंद्र जैन खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं. केजरीवाल सरकार के इस वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि हवाला कारोबारियों से उनका नाता नहीं और इस मामले में उन्हें आरोपी नहीं, बल्कि गवाह के रूप में बुलाया गया था. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों की जांच में उनका नाम सामने आया, जिनसे वह पहले जुड़े हुए थे और इसी संबंध में उनको समन किया गया.
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सत्येंद्र जैन पर हवाला काबोरियों के साथ सीधे संपर्क रखने का भी आरोप है. इससे पहले हाल ही में आई शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट के बाद से ही केजरीवाल सरकार बैकफुट पर है. सीबीआई का आरोप है कि जैन 2015-16 के दौरान लोक सेवक रहते हुए प्रयास इंफो सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, अकिनचंद डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 4.63 करोड़ रुपये के धनशोधन में शामिल थे. जैन के खिलाफ आरोपों में इन कंपनियों और इंडोमेटल प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 2010-12 के दौरान 11.78 करोड़ रुपये के कथित धन शोधन का भी मामला है.


सीबीआई का कहना है की उसने जो रिपोर्ट इनकम टैक्स से मिली उसे आधार बनाकर प्रिलिमिनरी एंक्वायरी दर्ज की है. सीबीआई के एक अफ़सर ने एनडीटीवी इंडिया को बताया, मामला नया बेनामी लेनदेन निषेध कानून के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा सीबीआई को भेजा गया था, उसे हमने अपनी जांच का आधार बनाया है. CBI के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि जैन के नियंत्रण वाली कंपनियों को कोलकाता स्थित जीवेंद्र मिश्रा, अभिषेक चोखानी और राजेंद्र बंसल नाम के तीन हवाला कारोबारियों की 56 शेल कंपनियों से 16.39 करोड़ रुपये मिले.


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