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Delhi Election 2020 : दिल्ली विधासभा चुनावों के लिए शुरू हुई वोटिंग, 70 सीटों पर कुल 652 उम्मीदवार मैदान में

Delhi Election Voting: दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. इस चुनाव के जरिए जहां आम आदमी पार्टी (AAP) को दोबारा सत्ता में आने की उम्मीद है वहीं बीजेपी (BJP) दिल्ली सरकार के सिंहासन पर काबिज होने की आशा लगाए है.

Delhi Election 2020 : दिल्ली विधासभा चुनावों के लिए शुरू हुई वोटिंग, 70 सीटों पर कुल 652 उम्मीदवार मैदान में

Delhi Elections 2020 Voting: दिल्ली में विधानसभा चुनाव शनिवार को (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  • मतदान सुबह आठ बजे शुरू और शाम को छह बजे समाप्त होगा
  • दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें, 11 फरवरी को घोषित होंगे नतीजे
  • मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच
नई दिल्ली:

Delhi Election Voting: दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. इस चुनाव के जरिए जहां आम आदमी पार्टी (AAP) को दोबारा सत्ता में आने की उम्मीद है वहीं बीजेपी (BJP) दिल्ली सरकार के सिंहासन पर काबिज होने की आशा लगाए है. मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे प्रमुख राज्यों को खो चुकी भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली को हासिल करने के लिए इस बार काफी जोर लगाया है. कांग्रेस (Congress) भी इस बार दिल्ली में सफलता पाने की उम्मीद लगाए है. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में इन तीनों दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. दिल्ली में शनिवार को सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ जो कि शाम छह बजे समाप्त होगा. दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं. इस चुनाव में 672 उम्मीदवार मैदान में हैं. दिल्ली के करीब 1.47 करोड़ मतदाता आज तय करेंगे कि दिल्ली पर किसका राज होगा. चुनाव के नतीजे 11 फरवरी को घोषित किए जाएंगे.

पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को 67 और बीजेपी को तीन सीटें मिली थीं. दिल्ली के शाहीनबाग और जामिया में सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के खिलाफ चल रहे आंदोलनों के दौर में यह चुनाव कहीं ज्यादा अहम हो गया है. चुनाव प्रचार में भी यह मुद्दे छाए रहे हैं.      

दिल्ली का यह विधानसभा चुनाव (Delhi Election) काफी कशमकश भरा है. बीजेपी इस चुनाव के जरिए पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में मिली हार की कुछ हद तक भरपाई करना चाहती है. पूर्व में लंबे अरसे तक दिल्ली के सिंहासन पर काबिज रही कांग्रेस भी सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए है. सत्ताधारी दिल्ली आम आदमी पार्टी ने विकास के नाम पर वोट मांगे हैं और उसे आशा है कि दिल्ली वासी उसे दूसरी बार भी चुनेंगे.

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दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 672 उम्मीदवार मैदान में हैं. दिल्ली में 1,47,86,382 मतदाता हैं जिनमें से 2,32,815 मतदाता 18 से 19 साल आयुवर्ग के हैं. दिल्ली में पुरुष मतदाताओं की तादाद 80,55,686 है, जबकि 66,35,635 महिला मतदाता हैं. राष्ट्रीय राजधानी में 815 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं, जबकि एनआरआई मतदाताओं की संख्या 489 है. दिल्ली में सर्विस वोटरों की कुल संख्या 11,556 है, जिनमें से 9,820 पुरुष मतदाता हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी में 55,823 मतदाता दिव्यांग श्रेणी के हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 2,689 स्थानों पर कुल 13,750 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं.

दिल्ली में चुनाव से पहले जामिया और शाहीन बाग में सुरक्षा बढ़ाने की मांग

चुनाव आयोग ने शनिवार को होने वाले 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Election) के मतदान के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं. राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं. शाहीन बाग समेत अन्य संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है. शाहीन बाग में चल रहे संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पांच मतदान केंद्रों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा है. क्षेत्र पर चुनाव आयोग की पैनी नजर है. संवेदनशील मतदान केंद्रों में 516 जगहों पर 3704 बूथ इस श्रेणी में हैं.

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दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणबीर सिंह का दावा है कि चुनाव में इस्तेमाल की रहीं सभी ईवीएम की जांच की गई है और वे फुलप्रूफ हैं. उनसे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव कर्मी ईवीएम और अन्य मतदान सामग्री कड़ी निगरानी में लेकर गए हैं. बड़ी संख्या में मतदान केंद्र  स्थापित हो गए हैं. मॉडल मतदान केंद्र सभी 70 निर्वाचन क्षेत्रों में, प्रत्येक में एक हैं. वहां एक-एक पिंक बूथ भी होंगे.

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इस बार चुनाव में मोबाइल ऐप, क्यूआर कोड, सोशल मीडिया इंटरफेस जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. दिल्ली के 11 जिलों की एक-एक ऐसी विधानसभा सीट चुनी गई है जिन पर मतदाता मतदान पर्ची बूथ पर नहीं लाने की स्थिति में स्मार्टफोन के जरिए हेल्पलाइन ऐप से क्यूआर कोड प्राप्त कर सकेगा. इनमें सुल्तानपुर माजरा, सीलमपुर, बल्लीमारान, बिजवासन, त्रिलोकपुरी, शकूर बस्ती, नई दिल्ली, रोहतास नगर, छतरपुर, राजौरी गार्डन और जंगपुरा शामिल हैं.

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दिल्ली में चुनाव के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) की 190 कंपनियों को तैनात किया गया है. इसके अलावा 40,000 पुलिसकर्मी और होमगार्ड के 19,000 जवान तैनात किए गए हैं. उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बुलाए गए होमगार्ड के जवान मतदान केंद्रों पर सुरक्षा में स्थानीय पुलिस की मदद करेंगे. पुलिस ने 504 गैरकानूनी हथियार जब्त किए हैं और 7,397 लाइसेंसी हथियार एहतियातन जमा करवा लिए हैं.

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इस चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी, बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव के लिए तीन सप्ताह से अधिक समय तक चला तूफानी प्रचार गुरुवार की शाम को थमा. कांग्रेस और भाजपा ने अपना प्रचार अभियान बड़े आक्रामक तरीके से चलाया. दिल्ली में 2015 में हुए विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को शानदार जीत हासिल हुई थी. उसने विधानसभा की 70 में 67 सीटें हासिल की थीं. बीजेपी को तीन सीटें मिली थीं और कांग्रेस की झोली पूरी तरह खाली रही थी.  आम आदमी पार्टी (AAP) को 54.3 फीसदी और बीजेपी को 32.2 फीसदी वोट मिले थे. कांग्रेस को सिर्फ 9.7 फीसदी वोट हासिल हुए थे.

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दिल्ली के इस चुनाव में दो लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट देंगे. दिल्ली के कुल मतदाताओं में से 2,08,883 मतदाता 18 से 19 साल के बीच हैं. यह लोग पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. दिल्ली की कुल आबादी करीब दो करोड़ है. इनमें से शहरी आबादी 97.5 प्रतिशत और ग्रामीण जनसंख्या 2.5 प्रतिशत है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 80 फीसदी लोग हिंदू समुदाय से हैं. इसके बाद 12.8 फीसदी मुस्लिम समुदाय, 4.4 फीसदी सिख समुदाय, 1.4 फीसदी जैन समुदाय, 1.0 फीसदी ईसाई समुदाय और 0.1 फीसदी बुद्ध समुदाय के लोग हैं.  इसके अलावा 0.2 फीसदी अन्य समुदायों के लोग हैं.

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दिल्ली राज्य विधानसभा का गठन पहली बार 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत किया गया था. लेकिन एक अक्टूबर 1956 को इसका उन्मूलन कर दिया गया. इसके बाद 1966 में विधानसभा की जगह 56 निर्वाचित और 5 मनोनीत सदस्यों वाली एक मेट्रोपोलिटन काउंसिल बनी. इसके बाद से 56 सीटों पर 1983, 1977 और 1972 में चुनाव हुए. साल 1991 में 69वें संविधान संशोधन अधिनियम 1991 और बाद में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम 1991 ने केंद्र-शासित दिल्ली को औपचारिक रूप से दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पहचान दी. इसके जरिए विधानसभा एवं मंत्री परिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधान निर्धारित किए गए. इसके बाद दिल्ली में सन 1993, 1998, 2003, 2008, 2013 और 2015 में विधानसभा चुनाव हुए.

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