दिल्ली सिविल लाइंस मर्सिडीज कांड: आरोपी पर नाबालिग की तर्ज पर चलेगा केस, SC ने HC के फैसले से सही बताया

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिस समय यह हादसा हुआ था उस समय आरोपी की उम्र 18 साल से कम थी.

दिल्ली सिविल लाइंस मर्सिडीज कांड: आरोपी पर नाबालिग की तर्ज पर चलेगा केस, SC ने HC के फैसले से सही बताया

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में मर्सिडीज कार से हुई दुर्घटना मामले में आरोपी पर नाबालिग के तौर पर ही मामला चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सही बताया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिस समय यह हादसा हुआ था उस समय आरोपी की उम्र 18 साल से कम थी. इसलिए उसे किशोर के रूप में ही माना जाएगा. 2016 के इस हादसे की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था कि आरोपी पर एक नाबालिग की तरह ही मामला चलेगा. इस फैसले के खिलाफ ही आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

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सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, हम एक पहेली को हल नहीं कर रहे हैं. हम एक कानून में शब्द को जोड़ या बदलाव नहीं कर सकते हैं. जब दो व्याख्याएं संभव हैं, तो किशोरों के लाभ में से एक को अपनाना होगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब कानूनी प्रावधान स्पष्ट है, तो अन्यथा इसकी व्याख्या करना संभव नहीं है. हम कानून से बंधे हैं.

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जस्टिस गुप्ता ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत अपराध का आरोप 'जघन्य' अपराध की श्रेणी में नहीं आता. हालांकि, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट यह कहता है कि किशोर को केवल 'जघन्य' अपराधों के मामलों में वयस्क के रूप में ट्रायल चलाया जा सकता है जहां न्यूनतम सजा सात साल की जेल है. जबकि जुवेनाइल बोर्ड का मानना ​​था कि अपराधी को एक वयस्क के रूप ट्रायल होना चाहिए क्योंकि उसे खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी थी और उसकी मानसिक क्षमता को देखते हुए ट्रायल होना चाहिए लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसके खिलाफ फैसला किया.