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दिल्ली की बिजली कंपनियां अपना बचाव करने में सक्षम : सुप्रीम कोर्ट

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दिल्ली की बिजली कंपनियां अपना बचाव करने में सक्षम : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली की बिजली कंपनियां अपना बचाव करने के लिए सक्षम हैं। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ की याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने बिजली कंपनियों के सीएजी आडिट के मामले में पक्षकार बनने की मांग की थी। जस्टिस जे चेलामेश्वर की बेंच ने कंज्यूमर युनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी की याचिका पर कहा कि आप क्यों बिजली कंपनियों का बचाव कर रहे हैं, कंपनियां खुद ही इस मामले को देख लेंगी। दरअसल सोसायटी की ओर से कहा गया है कि नियमों के मुताबिक खातों की सीएजी से ऑडिट नहीं हो सकती और इस केस की सुनवाई में वह कोर्ट की मदद करना चाहते हैं। अदालत ने इससे इंकार कर दिया है।

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खातों का ऑडिट कैग
दरअसल दिल्ली की तीन बिजली वितरण कंपनियों के खातों का ऑडिट कैग से कराने का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने 18 जनवरी को दिल्ली सरकार, सीएजी और एनजीओ ऊर्जा की याचिका पर बिजली वितरण कंपनियों को नोटिस दिया था।  दिल्ली सरकार ने कहा था कि सरकार का इनमें 49 फीसदी शेयर है। बिजली वितरण कंपनियों के खातों में बड़ी गड़बड़ियां हैं।

दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें उच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र की तीन बिजली वितरण कंपनियों के खातों का ऑडिट कैग से कराने के आप सरकार के फैसले को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार को बिजली कंपनियों के खातों का सीएजी से ऑडिट कराने का अधिकार नहीं है। साल 2014 में दिल्ली की बिजली कंपनियों के ऑडिट का आदेश दिया था, जिसे दिल्ली की बिजली कंपनियां टाटा पावर, दिल्ली ड्रिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, बीएसईएस, राजधानी पावर लिमिटेड और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


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