कोयला घोटाला मामले में सजा पाए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की सजा दिल्ली हाइकोर्ट ने निलंबित की

हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 23 नवबंर को होगी. गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने अपनी सजा को निलंबित करने के लिए निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

कोयला घोटाला मामले में सजा पाए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की सजा दिल्ली हाइकोर्ट ने निलंबित की

स्पेशल कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी

खास बातें

  • हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
  • मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी
  • विशेष अदालत ने रे को सुनाई थी तीन साल की सजा
नई दिल्ली:

कोयला घोटाला (Coal scam) मामले में सजा पाए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे (Dilip Ray) की सजा दिल्ली हाइकोर्ट (Delhi High Court) ने निलंबित कर दिया है . हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 23 नवबंर को होगी. गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने अपनी सजा को निलंबित करने के लिए निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. दरअसल स्पेशल कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को 1999 में झारखंड में एक कोयला कंपनी को अवैध रूप से आवंटित करने के लिए तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी.

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गौरतलब है कि सीबीआई (CBI) की एक विशेष अदालत ने 1999 में झारखंड में एक कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित कोयला घोटाले मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री रे को तीन साल की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने इस मामले में दो और लोगों को तीन साल की सजा सुनाई है. इन लोगों को हाल ही में दोषी करार दिया गया था. विशेष न्यायाधीश भारत पराशर ने सजा सुनाते हुए सभी दोषियों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (सीटीएल) पर 60 लाख और  कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने दोनों कंपनियों को भी दोषी करार दिया था.

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बता दें कि वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री (कोयला) रहे दिलीप रे को अदालत ने इस महीने की शुरुआत में आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया था.अदालत ने रे के अलावा कोयला मंत्रालय के तत्कालीन दो वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम, कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (सीटीएल), इसके निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) को भी दोषी करार दिया था. मामला 1999 में झारखंड के गिरिडीह में ‘ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक' के आवंटन से जुड़ा है.  

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