75 से ज्यादा लोगों की फ़र्ज़ी कोरोना रिपोर्ट बना चुका था MBBS डॉक्टर, गलत नाम छपने के बाद हुआ खुलासा

दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने एक डॉक्टर और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है. ये लोग एक नामी लैब के नाम से लोगों की फ़र्ज़ी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट तैयार करते थे, लोगों के सैंपल भी खुद ही ले लेते थे, अब तक ये लोग 75 से ज्यादा लोगों की कोरोना की फ़र्ज़ी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं.

75 से ज्यादा लोगों की फ़र्ज़ी कोरोना रिपोर्ट बना चुका था MBBS डॉक्टर, गलत नाम छपने के बाद हुआ खुलासा

लोगों को बेवकूफ बनाकर फ़र्ज़ी कोरोना रिपोर्ट बना रहा था डॉक्टर, गिरफ्तार.

खास बातें

  • दिल्ली में MBBS डॉक्टर गिरफअतार
  • लोगों की फर्जी कोरोना रिपोर्ट बना रहा था
  • गलत नाम छपने के कारण हुआ खुलासा
नई दिल्ली:

दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने एक डॉक्टर और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है. ये लोग एक नामी लैब के नाम से लोगों की फ़र्ज़ी कोरोना टेस्ट (Corona Tests) रिपोर्ट तैयार करते थे, लोगों के सैंपल भी खुद ही ले लेते थे, अब तक ये लोग 75 से ज्यादा लोगों की कोरोना की फ़र्ज़ी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं. इस मामले में कुछ और लोगों की तलाश की जा रही है.

दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर के मुताबिक, 30 अगस्त को दिल्ली के हौजखास थाने में नर्सें मुहैया कराने वाले एक शख्स ने शिकायत दी कि उसने 2 नर्सों को हायर करने के पहले उनका डॉक्टर कुश पाराशर से कोरोना टेस्ट कराया. डॉक्टर ने कोरोना टेस्ट के लिए नर्सों का सैंपल लिया और फिर मोबाइल पर PDF फॉरमैट में दोनों नर्सों की कोरोना की रिपोर्ट भेज दी. एक रिपोर्ट में एक नर्स का नाम गलत लिखा हुआ था. नाम ठीक कराने के लिए जब  रिपोर्ट में लिखी लैब में फोन किया गया तो पता चला उस लैब में उस नाम से किसी का कोरोना का टेस्ट ही नहीं हुआ.

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पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की तो पता चला कि डॉक्टर कुश बिहारी पाराशर ने रूस से MBBS किया है और वो मालवीय नगर के अलावा अलग-अलग जगहों पर क्लीनिक में बैठते हैं. उन्होंने अपने सोशल सर्किल के जरिए ये फैलाया कि वो कोरोना के सैंपल लेते हैं और जांच करवा देते हैं. इसके बाद उनके पास कोरोना की जांच के लिए लोग आने लगे. उन्होंने अपने एक सहयोगी अमित के जरिए अब तक 75 से ज्यादा लोगों के कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिए और नामी लैब्स के नाम पर कोरोना की फ़र्ज़ी रिपोर्ट तैयार कर दी. किसी की रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव तो किसी की रिपोर्ट में निगेटिव लिखा गया.

पुलिस के मुताबिक, हो सकता है कि किसी कोविड पॉजिटिव मरीज़ को रिपोर्ट में नेगेटिव बता दिया गया हो और उसकी वजह से कई और लोगों को कोरोना फैल गया हो या ऐसे भी लोग हो सकते हैं जो कोविड नेगेटिव हों और उन्हें रिपोर्ट में पॉजिटिव बता दिया गया हो, इसकी जांच चल रही है.

डॉक्टर कुश बिहारी पाराशर सैंपल लेने के बाद उन्हें नष्ट कर देता था. एक रिपोर्ट के वो 2400 रुपये वसूलता था. डॉक्टर और उसके सहयोगी अमित को गिरफ्तार कर लिया गया है. इनके कुछ और सहयोगियों की तलाश जारी है.

Video: कम भरोसेमंद टेस्ट पर इतना भरोसा क्यों?

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