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दिल्ली हिंसा : विवेक से नाम पूछा और आर्मेचर सिर पर मार दिया, शादी के 11 दिन बाद ही असफाक की मौत

जीटीबी अस्पताल में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 25 हो गया, कुल मरने वालों की तादात 27 हो गई, मरने वालों में से 13 लोगों की पहचान हुई

दिल्ली हिंसा : विवेक से नाम पूछा और आर्मेचर सिर पर मार दिया, शादी के 11 दिन बाद ही असफाक की मौत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में मरने वालों की तादाद 27 हो गई है.

खास बातें

  • जीटीबी अस्पताल में घायलों की तादाद बढ़कर 190 से ज्यादा हो गई
  • परिजनों को शवगृह से लेकर हास्पिटल तक में खोज रहे हैं लोग
  • नया बोर्ड बनाने के निर्देश के चलते पोस्टमार्टम में देरी हो रही
नई दिल्ली:

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के बाद जीटीबी अस्पताल में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 25 हो गया है. घायल 200 से ज्यादा हो गए हैं. अब तक चार पोस्टमार्टम हुए हैं. दो लगों की एलएनजेपी अस्पताल में मौत हुई है. यानी अब कुल मरने वालों की तादात 27 हो गई है. जीटीबी अस्पताल में मरने वालों में से 13 लोगों की पहचान हुई है. नौ लोगों की मौत गोली लगने से हुई है. तीन की चाकूबाजी से मौत और  एक की मौत जलने से हुई. दो लोगों की मौत गोली और धारदार हथियार से हुई. पांच की मौत धारदार वस्तु से कटने से हुई है.

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में घायलों की तादाद बढ़कर 190 से ज्यादा हो गई है. दंगों में जान गंवाने वालों की तादाद 27 हो गई है. लोग अपने अपने परिजनों को शवगृह से लेकर हास्पिटल तक में खोज रहे हैं.  

जीटीबी अस्पताल के सामने मुस्तफाबाद की रहने वाली शबनम ने कहा कि ''एनडीटीवी वाले सही दिखाते हैं इसलिए मैं आपके पास आई हूं. भाई जान हिन्दू मरे या मुसलमान इंसान क्या कुत्ता-बिल्ली भी नहीं मरने चाहिए. चाहे मजहब कोई और हो, जीने का सबको हक है. ऐसा नहीं है कि हिन्दू मरे तो खुश हो, या मुसलमान मरे...जैसा कत्लेआम हो रहे है, वो नहीं होना चाहिए. चाहे हिन्दू हों या मुसलमान..सब सही रहें.'' यह बात कहकर शबनम रोने लगीं. अस्पताल के बाहर शबनम को दिलासा देने वाले अमरपाल हैं. दोनों दंगे के शिकार अब एक-दूसरे को दिलासा दे रहे हैं.

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अस्पताल में अब भी घायलों को लाने का सिलसिला थमा नहीं है. विवेक के सिर पर लोहे की रॉड मार दी गई है...तो जीशान दो दिन से गायब अपने फूफा को खोजने मॉरचुरी के चक्कर लगा रहा है. जीशान ने कहा कि मेरे फूफा मजदूरी करके लौट रहे थे लोनी गोल चक्कर के पास पथराव हो रहा था. उनके साथ वाला लड़का भाग गया, उनका कहीं कोई पता नहीं है.

पीड़ित विवेक के दोस्त हरि ने बताया कि मेरा दोस्त विवेक जा रहा था. उसका नाम पूछा, फिर उसने क्या बताया, क्या नहीं मोटर का आर्मेचर सिर पर मार दिया. उसकी हालत गंभीर है.

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अस्पताल से सटे मॉरचुरी में शव लेने वालों की भीड़ लगी है. ब्रिज बिहार की रहने वाली राबिया और यास्मीन अपने देवर 22 साल के मेहताब की डेडबॉडी लेने के लिए दो दिन से इंतजार कर रही हैं. मेहताब बेलदारी का काम करता था और अपनी मां और बहन का सहारा था. यास्मीन ने कहा ये आप देखिए मेहताब की फोटो. तमाम मीडिया वालों को वह फोटो दिखा रही है. यास्मीन ने रोते हुए कहा कि मुझे कहता था कि मेरी शादी करवा दो, मेरी शादी करवा दो. कितना सुंदर था मेरा मेहताब.

उधर शिवविहार में दंगाइयों की गोली के शिकार 50 साल के वीरभान का शव भी उनके परिजनों को नहीं मिला है. वीरभान अपने बेटे के साथ जब लौट रहे थे तो उन्हें दंगाईयों ने पकड़ लिया. बेटा बच गया लेकिन वीरभान को दंगाईयों ने मार डाला. वीरभान के भतीजे अजय सिंह ने बताया कि वापस लौट रहे थे तभी दंगाईयों ने छत से गोली मारी जो उनके सिर पर लगी. बेटे को किसी तरह गली वालों ने बचाया.

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दिल्ली के दंगों में घायलों और मृतकों की तादाद धीरे-धीरे बढ़ रही है. अस्पताल से लेकर सड़कों तक अफरातफरी का माहौल है. नफरत फैलाने वाले नेताओं का अता पता नहीं है और गरीबों का घर उजड़ने का सिलसिला जारी है.

मंगलवार को गोली लगने से घायल हुए युवक असफाक की आज मौत हो गई. उसकी शादी 11 दिन पहले ही हुई थी. असफाक के भाई मुदस्सर ने कहा कि मेरे भाई के हाथ की मेंहदी भी नहीं छूटी थी और उसे दंगाइयों ने मार डाला. मुदस्सर फफक-फफक कर रो रहा था. मंगलवार को असफाक अपनी कंपनी में काम करके वापस लौट रहा था तभी ब्रिजपुरी तिराहे के पास दंगाइयों ने उसे गोली मार दी. असफाक को पांच गोलियां लगी थीं. उसकी शादी 14 फरवरी को हुई थी.

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असफाक (फाइल फोटो).

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जीटीबी के एमडी सुनील कुमार ने बताया कि आज 33 घायल जीटीबी में लाए गए हैं. पांच से छह लोग गोली से घायल हुए हैं. पोस्टमार्टम में इसलिए देरी हो रही है क्योंकि पुलिस के निर्देश हैं कि नया बोर्ड बनाकर पोस्टमार्टम किए जाएं. सीटी स्कैन मशीन एक महीने से खराब है. यह 30 साल पुरानी मशीन है. हम राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सीटी स्कैन करा रहे हैं.

दारुल उलूम देवबंद के मौलाना महमूद मदनी जीटीबी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने कहा कि अस्पताल में सहूलियत नाकाफी हैं. जिस तरह की संवेदनशीलता होनी चाहिए, नहीं दिखाई पड़ रही है. हालात आप बेहतर समझ रहे हैं. लोग शांति बनाए रखें. पुलिस संयम से काम करे हम तो यही कह सकते हैं.

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