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विमान हादसे में मृत जवान के बच्चों को मदद मिली नहीं, आवास छीना जा रहा

दर-दर भटक रहे बीएसएफ के सब इंस्पेक्टर रवीन्द्र कुमार के बच्चों का सवाल- आखिर उनका कसूर क्या है?

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विमान हादसे में मृत जवान के बच्चों को मदद मिली नहीं, आवास छीना जा रहा

बीएसएफ के सब इंस्पेक्टर रवींद्र कुमार और उनका परिवार (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. हादसे के बाद रवींद्र की पत्नी भी चल बसी, पेंशन नहीं मिल सकी
  2. अनाथ बेटे और बेटी को नहीं मिली अनुकंपा नियुक्ति
  3. विमान हादसे का कारण नहीं बताया जा रहा, जांच पूरी नहीं हुई
नई दिल्ली: पहले पिता का साथ छूटा और फिर मां का साया भी नहीं रहा और अब सरकार ने भी हाथ झटक दिया है. कभी पापा की लाडली रही सलोनी को मुसीबतों ने समय से पहले बड़ा कर दिया है. कुछ यही हाल उसके छोटे भाई और फर्स्ट इयर के छात्र अभिमन्यु का है. कभी पिता की देशसेवा पर गर्व करने वाले बच्चे आज देश से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनका कसूर क्या है?
 
करीब दो साल पहले आज ही के दिन दिल्ली में बीएसएफ के एक विमान हादसे में मारे गए दस परिवारों को अब तक हादसे की सही वजह का पता नहीं चल पाया है. और तो और इसी हादसे में मारे गए सब इंसपेक्टर रवीन्द्र कुमार के परिवार की पेंशन भी शुरू नही हो पाई है. अब उनके परिवार से सरकारी घर खाली कराया जा रहा है.
 
सलोनी और उसके भाई अभिमन्यु पर दुखों का पहाड़ तब और टूट पड़ा जब पिता के जाने के नौ महीने बाद सदमे में मां भी चल बसी. बीएसएफ की ओर से नौकरी का वादा किया गया जो अव तक पूरा नहीं हुआ. अब तक पेंशन भी शुरू नहीं हुई है. अब घर भी खाली कराया जा रहा है. अभिमन्यु कहते हैं कि हम चाहते हैं पापा का हक मिले ..कोई नौकरी नहीं है. कम से कम छत तो न छीनें. दूसरा कोई सहारा मिलने तक तो हमें यहां रहने दिया जाए.
 
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जब दो साल पहले उसके पिता की मौत हुई थी तब प्रधानमंत्री से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री तक ने दुख जताया था. बीएसएफ ने मदद करने की बात कही थी लेकिन अब उसे लगता है कि सबने उन्हें अकेला छोड़ दिया है. हालत यह कि पिता के मरने के बाद पिछले दो साल में उसके घर बीएसएफ का कोई भी अधिकारी उसके घर उसका हालचाल लेने नहीं आया जबकि उसके घर से बीएसएफ हेडक्वार्टर महज 700 मीटर दूर है. मां के मरने के बाद भी उसके घर पर उनका हालचाल लेने कोई नहीं आया जबकि बीएसएफ को इस बात की जानकारी थी कि उसकी मां की  मौत हो गई. किसी पार्टी का कोई नेता भी मिलने के लिए नहीं आया. जब उसके पिता की मौत हुई थी तब सारे चैनलों और अखबारों ने कवर किया था. यही नहीं केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ से भी मिलने की कोशिश की लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई.

सलोनी कहती है कि हमने सबको अपना दुख बताया. सबके पास अपना दुखड़ा सुनाया लेकिन कोई भी हमारा हाल पूछने नहीं आया. सलोनी के पिता की 22 दिसंबर 2015 को मौत हो गई और उसकी मां मनोरमा का सितंबर 2016 का. अब तक सलोनी के लिए पिता की पेंशन भी शुरू नहीं हो पाई है. जबकि उसने इससे जुड़े सारे कागजात दिसंबर 2016 को ही जमा करा दिए गए थे. सलोनी 23 साल की है और उसका भाई अभिमन्यु 20 साल का है. सलोनी ने बीटेक कर लिया है और उसका भाई पत्राचार से फर्स्ट इयर का छात्र है. उसके पिता की नौकरी तो 2023 तक की थी.  इसका मतलब है उसका यह फ्लैट पांच साल और उसके पास रहना चाहिए. इस बारे में सलोनी ने बीएसऍफ़ डीजी को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया कि जब तक उसके भाई को नौकरी नहीं लगती है तब तक उसे इस फ्लैट में रहने दिया जाए. इसकी कॉपी उसने गृहमंत्री के पास भेजी लेकिन कोई जवाब नहीं आया.  
 
सलोनी ने आरटीआई के जरिए सवाल पूछा कि आखिर हादसे की वजह क्या रही? तो उसे यही बताया गया कि अभी तक जांच ही चल रही है. उसे इसी साल 26 जुलाई 2017 को सिविल एविएशन डिपार्टमेंट की ओर से बताया गया कि एयरक्रॉफ्ट एक्सिडेंट एविएशन ब्यूरो इसकी जांच कर रहा है और वो पूरी नहीं हुई है. यही बात उसे 4 जून 2016 को आरटीआई से मिले जवाब में बताई गई थी.

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सलोनी ने हादसे के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से सवाल पूछा था. उस वक्त भी इसे जवाब नहीं मिला था और जवाब आज तक भी नहीं मिला है. उस वक्त उसने राजनाथ सिंह से पूछा था कि वीआईपी प्लेन हादसे के शिकार क्यों नहीं होते हैं ..ऐसा क्यों होता है कि अक्सर जवान के प्लेन ही दुर्घटनाग्रस्त होते हैं. सलोनी तीन बार केन्द्रीय गृह मंत्री के घर गई लेकिन एक बार भी मुलाकात नहीं हो पाई. हर बार निराश होकर घर लौट आई .
   
सलोनी और अभिमन्यु के सवालों को लेकर हमने बीएसएफ के पास चिट्ठी भी भेजी लेकिन अभी तक कोई अधिकारिक जवाब नहीं आया है. बीएसएफ के एक अधिकारी ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि हादसे की जांच रिपोर्ट अभी तक बीएसएफ को भी नहीं मिली है. इस मामले की जांच डीजीसीए कर रहा है और उसने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है. जहां तक पेंशन की बात है तो बीएसएफ ने अपनी तरफ से फाइल क्लियर करके पेंशन आफिस आरकेपुरम भेज दी है. उम्मीद है जल्द ही पेंशन शुरू हो जाएगी. अनुकंपा के आधार पर रवीन्द्र के लड़के को नौकरी मिलेगी लेकिन इसकी एक प्रकिया है उसके तहत ही नौकरी मिल पाएगी. हमने प्रकिया शुरू कर दी है पर कब तक हो पाएगा ये कहना फिलहाल मुश्किल है. सरकारी क्वार्टर का सवाल है तो इसमें जो नियम है उसी का पालन किया जा रहा है. हालांकि अपवाद मामले में कुछ रियायत दी जाती है लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है.

इस पर सलोनी कहती है कि हम तो अब सड़क पर आ जाएंगे. कौन हमारी सुरक्षा करेगा? हम तो बस इतना चाहते हैं कि जब तक हमारे भाई को नौकरी नहीं मिलती है तब तक तो घर में रहने दिया जाए.

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सवाल यह है कि आज जिस हालात से सलोनी और उसका भाई गुजर रहा है उसमें उनकी क्या गलती है? हुक्मरान क्यों आंखें बंद किए बैठे हैं और कब तक सलोनी-अभिमन्यु जैसे बच्चे अपने पिता की शहादत का सर्टिफिकेट लेकर दर-दर भटकते रहेंगे.


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