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निजता का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड का मामला 9 सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपा

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के मामले की सुनवाई करते हुए आज इस  केस को 9 सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया है. अब दो दिनों तक यह पीठ लगातार मामले से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनेगी. पहले इस मामले को पांच जजों की बेंच को सुनवाई करनी थी, लेकिन आज कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले को 9 सदस्यीय बेंच के पास भेज दिया. 

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निजता का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड का मामला 9 सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपा

आधार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई
  2. याचिकाकर्ता : सरकार आधार को एकाग्रता शिविर की तरह इस्तेमाल कर रही है
  3. वहीं AG ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ये शब्द सही नहीं है
नई दिल्ली: क्या आधार राइट टू प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन करता है? आधार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के मामले की सुनवाई करते हुए आज इस  केस को 9 सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया है. अब दो दिनों तक यह पीठ लगातार मामले से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनेगी. पहले इस मामले को पांच जजों की बेंच को सुनवाई करनी थी, लेकिन आज कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले को 9 सदस्यीय बेंच के पास भेज दिया. 

पांच जजों की बेंच ने आज सुनवाई करते हुए कहा कि जरूरी है यह तय हो कि क्या संविधान के तहत निजता का अधिकार है या नहीं, इसलिए इस मामले को नौ सदस्यों वाली पीठ के पास भेजा जाना चाहिए. यह इसलिए करना पड़ा क्योंकि 1954 में 8 जजों की बेंच ने और 1962 में 6 जजों की बेंच यह फैसला सुना चुकी है कि निजता का अधिकार नहीं होता. इसलिए इस मामले में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 9 जजों की बेंच का गठन होना चाहिए.

ये पीठ दो दिनों तक सुनवाई करेगी. इस पीठ में CJI जे एस खेहर, जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस AR बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा था कि आधार को लेकर निजता के हनन समेत जो मुद्दे आ रहे रहे हैं उनका हल 5 जजों ली संविधान पीठ ही कर सकती है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र को कहा कि वो मामले को चीफ जस्टिस के पास जाएं और संविधान पीठ के गठन की गुहार लगाएं. सुप्रीम कोर्ट ने  आधार को लेकर अंतरिम रोक संबंधी आदेश जारी करने से इंकार कर दिया था.

आधार को लेकर करीब 22 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं. उधर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि सरकार आधार को कनसेंट्रेशन कैंप (Concentration camp) यानी एकाग्रता शिविर की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि वो एक जगह से ही सब नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रख सके. वहीं AG ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ये शब्द सही नहीं है.

जन कल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य बनाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.  पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने कहा था कि जन कल्याणकारी योजनाओं को लाभ 30 सितंम्बर तक उन्हें भी मिलेगा जिनके पास आधार कार्ड नही है. केंद्र सरकार ने कहा था कि जिनके पास आधार नही है वो दस में से किसी भी दूसरे पहचान पत्र को दिखाकर जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकते है. जैसे राशन कार्ड, वोटर कार्ड आदि.

दरअसल शांता सिंहा व अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने से रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं. याचिका में कहा गया है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड को जोड़ने के लिए सरकार ने तीस जून की डेडलाइन तय कर रखी है जो कि पूरी तरह अवैध है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है.


 


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