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बोर्ड ने नाम में गलती की, व्‍यक्ति को नौकरी में भुगतना पड़ा खामियाजा

ऐसा इसलिए क्‍योंकि नाम की स्‍पेलिंग में गलती की वजह से उनको भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. यहां तक कि उनको नौकरी में देरी हुई और इस चक्‍कर में उनकी वरिष्‍ठता भी प्रभावित हो गई.

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बोर्ड ने नाम में गलती की, व्‍यक्ति को नौकरी में भुगतना पड़ा खामियाजा

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

खास बातें

  1. सिद्धार्थ हांडा ने 2012 में नौकरी के लिए आवेदन किया
  2. 2015 में उनका चयन हुआ
  3. लेकिन बोर्ड के नाम की गलती की वजह से ज्‍वाइनिंग में देरी हुई
नई दिल्ली: वैसे तो यह कहावत कही जाती है कि अरे नाम में क्‍या रखा है लेकिन सिद्धार्थ हांडा (Siddharth Handa) पर यह कहावत सही नहीं बैठती. ऐसा इसलिए क्‍योंकि नाम की स्‍पेलिंग में गलती की वजह से उनको भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. यहां तक कि उनको नौकरी में देरी हुई और इस चक्‍कर में उनकी वरिष्‍ठता भी प्रभावित हो गई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दरअसल सिद्धार्थ ने दिल्‍ली अधीनस्‍थ सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड (DSSSB) में नौकरी के लिए 2012 में आवेदन किया. 2015 में परीक्षा पास करने के बाद उनका चयन हुआ लेकिन उनको तत्‍काल ज्‍वाइनिंग नहीं दी गई.

उसका एक बड़ा कारण यह रहा कि DSSSB की सूची में गलती से उनका सिद्धार्थ मांडा (Siddharth Manda)हो गया. इस वजह से उनको ज्‍वाइनिंग नहीं दी गई और काफी दौड़भाग और कागजी कार्रवाई के बाद उनको सितंबर 2016 में उस पद के लिए ज्‍वाइनिंग दी गई. इसका असर यह हुआ कि वह उसी पद के लिए अपने समकक्षों से जूनियर हो गए क्‍योंकि बाकियों की ज्‍वाइनिंग पहले ही हो गई थी.

सिद्धार्थ को परेशानी दरअसल उस वक्‍त ज्‍यादा हुई जब दिसंबर, 2015 में बोर्ड के चेयरमैन ने उनके नाम के शुद्धिकरण संबंधी रिकॉर्ड पर मुहर लगा दी थी लेकिन उसके बाद भी अगस्‍त, 2016 तक उनकी फाइल को लटकाए रखे गया. अपने केस की जानकारी के लिए इस संबंध में उन्‍होंने आरटीआई भी दाखिल किए लेकिन कोई जवाब नहीं दिया. उसके बाद वह अपने केस को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) पहुंचे तो वहां मामले का संज्ञान लिया गया.

अब सीआईसी ने संबंधित सूचना अधिकारी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि आपने सूचना के प्रवाह को क्‍यों रोका? आपने आवेदक को सूचना क्‍यों नहीं दी? जानबूझकर सूचना देने से इनकार करने की वजह से आपके ऊपर 25 हजार का जुर्माना क्‍यों ना लगाया जाए और साथ ही DSSSB से कहा है कि आवेदक के नुकसान की भरपाई के लिए बोर्ड को तीन लाख का मुआवजा देना चाहिए.


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