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के पलानीस्वामी ने ट्विटर पर पीएम मोदी से की देश भर में तमिल को वैकल्पिक विषय बनाने की मांग, बाद में डिलीट किया ट्वीट

पलानीस्वामी का ये ट्वीट ऐसे समय में सामने आया है जब नई राष्ट्रीय शिक्षा समिति के मसौदे में हिंदी की अनिवार्यता लागू किए जाने को लेकर विरोध हो रहा है.

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के पलानीस्वामी ने ट्विटर पर पीएम मोदी से की देश भर में तमिल को वैकल्पिक विषय बनाने की मांग, बाद में डिलीट किया ट्वीट

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. तमिल को वैकल्पिक भाषा बनाने के लिए किया पीएम को ट्वीट
  2. बाद में डिलीट भी कर दिया ट्वीट
  3. नई शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी की अनिवार्यता को लेकर हो रहा विरोध
नई दिल्ली:

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी (Edappadi K Palaniswami) ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से तमिल (Tamil) भाषा को पूरे भारत के पाठ्यक्रम में एक वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके लिए ट्वीट किया था लेकिन बाद में इसी ट्वीट को डिलीट कर दिया. उन्होंने लिखा, "माननीय पीएम नरेंद्र मोदी जी से अनुरोध है कि तमिल को अन्य राज्यों में अध्ययन के लिए एक वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल करें. यह दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक भाषा की महान सेवा होगी." 

नई शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी को शामिल करने पर तमिलनाडु में उबाल, विरोध शुरू

पलानीस्वामी का ये ट्वीट ऐसे समय में सामने आया है जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी की अनिवार्यता लागू किए जाने को लेकर विरोध हो रहा है. केंद्र ने नई शिक्षा समिति में तीन-भाषा के फार्मूले का सुझाव दिया था, जिसे कई राजनेताओं ने हिंदी का थोपा जाना करार दिया था. 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के मसौदे में, तीन-भाषा के फार्मूले में गैर-हिंदी भाषी राज्यों में मातृभाषा के अलावा अंग्रेजी और हिंदी को शामिल करने की सिफारिश की गई है, जबकि हिंदी-भाषी राज्यों में अंग्रेजी और एक अन्य भारतीय भाषा को शामिल करना है. 

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गैर-हिंदी भाषी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक के कई नेताओं ने इस नीति का विरोध किया था. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नेताओं ने कहा कि राज्य किसी भी तीसरी भाषा का थोपा जाना बर्दाश्त नहीं करेगा.   कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र किसी भी भाषा के लिए बाध्य नहीं कर सकता है. हालांकि, केंद्र ने यह सुनिश्चित किया है कि नीति केवल एक मसौदा थी, जो परिवर्तनों के अधीन है और यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी भाषा के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा.

वीडियो: विरोध के बाद नई शिक्षा नीति से खत्म हुई हिंदी की अनिवार्यता​



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