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Haryana Election Result 2019: कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र हुड्डा बोले- 'हमें पूर्ण बहुमत मिलता अगर...'

Election Result 2019: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (BS Hooda) ने NDTV से बात करते हुए कहा कि थोड़ा और समय मिलता तो पूर्ण बहुमत भी मिल जाता.

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खास बातें

  1. 'थोड़ा और समय मिलता तो पूर्ण बहुमत मिल जाता'
  2. 'जनादेश हरियाणा की भाजपा सरकार के खिलाफ है'
  3. 'मौजूदा सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया'
नई दिल्ली:

Haryana Election Result: हरियाणा विधानसभा चुनाव में BJP ने 'अबकी बार 75 पार' नारा दिया था, लेकिन पार्टी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन करने में नाकाम नजर आ रही है. रुझानों में हरियाणा में बीजेपी 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं, कांग्रेस भी 30 सीटों पर आगे है. हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी (JJP) यहां किंगमेकर के रूप में उभरकर सामने आई है. जेजेपी 10 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, दूसरी तरफ कमजोर मानी जा रही कांग्रेस ने एक तरह से उलटफेर किया है और 30 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (BS Hooda) ने NDTV से बात करते हुए कहा कि थोड़ा और समय मिलता तो पूर्ण बहुमत भी मिल जाता.

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हरियाणा कांग्रेस से वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ने कहा, 'हमें थोड़ा और समय मिलता तो पूर्ण बहुमत मिल जाता. जनादेश हरियाणा की भाजपा सरकार के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि सबको मिलकर एक मजबूत सरकार बनानी चाहिए.  उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री पद ऑफर करने जैसी अभी कोई बात नहीं है. इस बारे में बैठकर बात करेंगे. मेरी दुष्यंत चौटाला से कोई बात नहीं हुई है. सोनिया जी हमारी नेता हैं और उन्होंने फोन करके मुझे बधाई दी है. मुख्यमंत्री कौन होगा यह विधायक पार्टी और गठबंधन में बातचीत होगी.


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उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार बहुत विफल रही है. हर वर्ग इनसे नाराज था. 2014 में 154 वादे किए थे, लेकिन कोई भी पूरा नहीं किया. बीजेपी के मंत्रियों की हार हुई है इसलिए नैतिकता के आधार पर उनको खुद सरकार छोड़ देनी चाहिए और सरकार बनाने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए. 

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बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों राज्यों में पार्टी ने कोई स्थानीय चेहरा तय किए बगैर ही चुनाव लड़ा था. हरियाणा में 47 सीटें जीतकर पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी तो महाराष्ट्र में सर्वाधिक 122 सीटें जीतने के बाद भी बहुमत से दूर रहने पर शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार बनाना पड़ा था.



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