मुंबई में अतिक्रमण हटाने का मतलब सिर्फ खोमचे वालों पर डंडे बरसाना

मुंबई में अतिक्रमण हटाने का मतलब सिर्फ खोमचे वालों पर डंडे बरसाना

प्रतीकात्मक फोटो

मुंबई:

बीएमसी आयुक्त अजोय मेहता ने मुम्बई की सड़कों और फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू की है। खोमचे वालों और होटल रेस्टोरेंट द्वारा कब्जा की गई जगह को खाली कराने के लिए बीएमसी की गाड़ियां दिन भर शहर में घूमती रहती हैं। अजोय मेहता ने सभी वार्डों के अधिकारियों को अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

आयुक्त ने दिए हर तीन में रिपोर्ट देने के निर्देश
आयुक्त ने हर तीन महीने में उन्हें उन होटलों और रेस्टोरेंटों की रिपोर्ट देने को कहा है जो कि सड़क या फुटपाथ पर अतिक्रमण किए हुए हैं। साथ ही उन पर की जाने वाली कार्रवाई की भी रिपोर्ट मांगी हैं। हालांकि बीएमसी सिर्फ खोमचे वालों के खिलाफ ही कार्रवाई करती नजर आती है। शहर में हजारों की संख्या में खोमचे वाले हैं। यह हजारों परिवारों की कमाई का साधन है, लेकिन सड़क और फुटपाथ पर चलने वालों के लिए यह परेशानी का सबब भी है। इसीलिए बीएमसी ने इन्हें हटाने का काम शुरू किया है।

खोमचे वालों को जगह देने की जरूरत
डिप्टी मेयर अलका केरकर का कहना है कि 'रोड और फुटपाथ चलने के लिए हैं। फुटपाथ पर अतिक्रमण की वजह से लोगों को परेशानी होती है, इसलिए खोमचे वालों को हटाना जरूरी है, लेकिन खोमचे सभी की जरूरत भी हैं इसलिए इन्हें सही तरह से बसाने पर भी काम किया जाना चाहिए। साप्ताहिक बाजार लगाए जा सकते हैं। नए बाजार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।'

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बीएमसी का सारा ध्यान सिर्फ खोमचे वालों को हटाने पर है। उन्हें बसाने की ओर न तो बीएमसी का ध्यान है और न ही राज्य सरकार का। होटल और  रेस्टोरेंट भी बड़ी संख्या में  फुटपाथ या सड़कों पर कब्ज़ा किए हुए हैं। बीएमसी आयुक्त ने इन पर भी कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन अतिक्रमण मुक्त मुम्बई के नाम पर हर तरह की कार्रवाई बस खोमचे वालों पर होती है। बिखरे हुए ठेले...कुचला हुआ सामान... इसी तरह शहर के सभी इलाकों से इन खोमचे वालों को हटाया जाता है।

बीएमसी की गाड़ी कर जाती है बहुत नुकसान
मोहम्मद हुसैन का वर्ली इलाके में सब्जी का ठेला है। वे कहते हैं कि, 'जब भी बीएमसी की गाड़ी आती है तो हमारा बड़ा नुकसान हो जाता है। 5 से 10 हजार का सामान लाओ तो उठा के ले जाते हैं। फिर 2500 उस सामान को छुड़वाने में लग जाते हैं।'
 
बीएमसी को होटलों और रेस्टोरेंटों द्वारा फुटपाथ पर किया गया कब्ज़ा दिखाई नहीं देता। सड़कों पर बेतरतीब पार्क की गई गाड़ियों के मालिकों पर कार्रवाई महज़ कागजों पर ही हो रही है।