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चुनाव में धांधली? : आखिर ये वीवीपीएटी पर्ची है क्या जिसकी बात अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं, आइए समझें

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चुनाव में धांधली? : आखिर ये वीवीपीएटी पर्ची है क्या जिसकी बात अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं, आइए समझें

ईवीएम (EVM) के साथ वीवीपीएटी (VVPAT) के प्रयोग से सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा.

नई दिल्ली: पांच राज्यों में हुए चुनावों में परिणामों से असंतुष्ट राजनीतिक दलों ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है. सबसे पहले ईवीएम पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सवाल उठाया तो उसके बाद आम आदमी पार्टी की ओर से यही कहा गया कि ईवीएम के जरिए चुनावों में गड़बड़ी की गई है. इसके बाद कांग्रेस पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने भी ईवीएम को कठघरे में खड़ा कर दिया है. आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह 2019 में इस तकनीक से पूरी तरह आम चुनाव कराने में सक्षम हो जाएगा.

शाम होते होते आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस पर ईवीएम पर प्रश्नचिह्न लगा दिया. अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में चुनावों में धांधली की बात कही है तो बीएसपी प्रमुख पंजाब के चुनावों को सही बता रही हैं और यूपी में धांधली बता रही हैं.

खैर कहां गड़बड़ी हुई है, या हुई भी नहीं है या फिर चुनावी दल हार का ठीकरा किसी भी पर मढ़ने की वजह ढूंढ रहे हैं यह तो जांच से पता चलेगा. लेकिन चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाकर में इन दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देने का काम किया है.

इस पूर प्रक्रिया में ईवीएम पर सवाल उठाने वालों को अब केवल चुनाव आयोग ही जवाब दे सकता है. यह जवाब भी सैंपलिंग के तौर पर चुनाव आयोग जो वीवीपीएटी मशीन ईवीएम के साथ लगाता है, उसमें प्राप्त मतों को गिनती से दिया जा सकता है.

यह वीवीपीएटी मशीन क्या है. यह क्या करती है और क्यों इसका प्रयोग किया जाता है, आइए समझें...
मतदाता पावती रसीद यानी वोटर वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) मतपत्र रहित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का एक तरीका है. इसका उद्देश्य इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की स्वतंत्र पुष्टि है. यह व्यवस्था मतदाता को इस बात की पुष्टि करने की अनुमति देती है कि उसकी इच्छानुसार मत पड़ा है या नहीं. इसे वोट बदलने या वोटों को नष्ट करने से रोकने के अतिरिक्त उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

वीवीपीएटी के तहत प्रिंटर की तरह का एक उपकरण इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ा होता है. जब वोट डाला जाता है तब इसकी एक पावती रसीद निकलती है इस पावती पर क्रम संख्या, नाम तथा उम्मीदवार का चुनाव चिह्न दर्शाया जाता है. इस व्यवस्था के तहत मतदाता द्वारा उम्मीदवारों के नाम का बटन दबाते ही, उस उम्मीदवार के नाम और पार्टी के चिह्न की पर्ची अगले 10 सेंकेड में मशीन से बाहर निकल जाती है. इसके बाद यह एक सुरक्षित बक्से में गिर जाएगी. यह उपकरण वोट डाले जाने की पुष्टि करता है तथा इससे मतदाता ब्यौरों की पुष्टि कर सकता है. रसीद एक बार दिखने के बाद ईवीएम से जुड़े कन्टेनर में चली जाती है. दुर्लभतम मामलों में केवल चुनाव अधिकारी को ही इस तक पहुंच हो सकती है.

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यह प्रणाली पहली बार प्राप्त रसीद के आधार पर मतदाता को अपने वोट को चुनौती देने की अनुमति देती है. नये नियम के अनुसार मतदान केन्द्र के पीठासीन अधिकारी को मतदाता की अस्वीकृति दर्ज करनी होगी तथा इस अस्वीकृति को गिनती के समय ध्यान में रखना होगा. वीवीपीएटी प्रणाली का निर्माण ईवीएम पर संदेहों के कारण नहीं बल्कि प्रणाली को उन्नत बनाने के हिस्से के रूप में हुआ था.

वीवीपीएटी उपयोग को बढ़ावा देने वाली घटनाओं का क्रमिक विकास कुछ इस प्रकार बताया जाता है...
  1. 04 अक्तूबर, 2010 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में ईवीएम के इस्तेमाल को जारी रखने के बारे में व्यापक सहमति थी तथा अनेक राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि वीवीपीएटी को शामिल करने की संभावना तलाशी जानी चाहिए.
  2. निर्वाचन आयोग ने वीवीपीएटी की संभावना जानने के लिए मामले को विशेषज्ञ समिति के पास भेजा तथा इसके निर्माताओं- भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बंगलौर (बीईएल) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद (ईसीआईएल) को वीवीपीएटी प्रणाली का नमूना (प्रोटोटाइप) विकसित करने का निर्देश दिया.
  3. तकनीकी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर जुलाई, 2011 में आम मतदाताओं, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों तथा मीडिया की मौजूदगी तथा उनकी भागीदारी के साथ फील्ड में इसका प्रयोग तिरूअनंतपुरम, दिल्ली, जैसलमेर, चेरापूंजी तथा लेह में किया गया.
  4. पहले फील्ड प्रयोग के बाद समिति की सिफारिश के आधार पर इसमें परिवर्तन किया गया. फील्ड में इसका दूसरा प्रयोग जुलाई-अगस्त, 2012 में दिल्ली, तिरूअनंतपुरम, लेह, जैसलमेर तथा चेरापूंजी में किया गया. तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने 19 फरवरी, 2013 को अपनी बैठक में वीवीपीएटी की अन्तिम डिजाइन को मंजूरी दी.
  5. भारत सरकार ने 14 अगस्त, 2013 को एक अधिसूचना के जरिए चुनाव कराने संबंधी नियम, 1961 को संशोधित किया. इससे आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ वीवीपीएटी के इस्तेमाल का अधिकार मिला.
  6. सितम्बर, 2013 में नगालैण्ड के त्वेनसांग में नोकसेन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का प्रयोग किया गया.
  7. उच्चतम न्यायालय ने अक्तूबर 2013 में सुब्रह्मण्यम स्वामी बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में व्यवस्था देते हुए कहा कि वीवीपीएटी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के लिए अपरिहार्य है तथा भारत निर्वाचन आयोग को वीवीपीएटी प्रणाली की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम को वीवीपीएटी से जोड़ने का निर्देश दिया.
  8. उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को 2014 के आम चुनावों के लिए चरणबद्ध तरीके से ईवीएम में पावती रसीद लागू करने का निर्देश दिया था, और कहा था कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा. शीर्ष न्यायालय ने वीवीपीएटी प्रणाली लागू करने के लिए केन्द्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया था.
  9. निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया. 1,18,596 पंजीकृत मतदाताओं वाले 186 मतदान केन्द्रों में पायलट परियोजना शुरू की गई थी.
  10. निर्वाचन आयोग ने मिजोरम चुनाव विभाग को हाल में 40 सदस्यों वाली मिजोरम विधानसभा के चुनावों के दौरान 10 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया था. वीवीपीएटी प्रणाली दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के एक-एक निर्वाचन क्षेत्रों में भी लागू की गई थी.
  11. आयोग को आगामी लोकसभा चुनावों में सभी 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए लगभग 14 लाख वीवीपीएटी मशीनों की आवश्यकता होगी. आयोग महसूस करता है कि 2019 के आम चुनावों के पहले सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी मशीनें लगाना संभव नहीं होगा. आयोग ने कहा है कि वीवीपीएटी मशीनें प्राप्त करने तथा देश के सभी मतदान केन्द्रों पर इसे लगाने के लिए लगभग 1500 करोड़ रुपयों की आवश्यकता होगी.



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