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क्यों IITians को बनानी पड़ी बहुजन आज़ाद पार्टी, पढ़ें खास बातचीत

पिछले कुछ दिनों से बहुजन आजाद पार्टी की चर्चा काफी जोर शोर से है.

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क्यों IITians को बनानी पड़ी बहुजन आज़ाद पार्टी, पढ़ें खास बातचीत

बहुजन आजाद पार्टी के संस्थापक सदस्य

नई दिल्ली:

पिछले कुछ दिनों से बहुजन आजाद पार्टी की चर्चा काफी जोर-शोर से है. ऐसा कहा जा रहा है कि 50 IITian  ने अपनी नौकरी छोड़ कर पार्टी बनाई है, जिसका मुख्य मकसद है दलितों के लिए काम करना. पार्टी के जरिए ये लोग दलितों की समस्या का समाधान करना चाहते हैं. 2020 में बिहार में होने वाले विधान सभा चुनाव चुनाव में यह लोग अपना किस्मत आज़माना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर इस पार्टी की काफी चर्चा है. कुछ लोग इस पार्टी की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग आलोचना करने में लग गए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इस पार्टी के पीछे आरएसएस का हाथ है, क्योंकि बिहार विधान सभा चुनाव में आरएसएस दलित वोट का विभाजन करना चाहता है.

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अगर ऐसा हुआ तो आरजेडी जैसी बड़ी पार्टी को नुकसान हो सकता है, लेकिन बहुजन आज़ाद पार्टी के सदस्य ऐसे आरोप को निराधार बता रहे हैं. इनका कहना है कि आरएसएस जानबूझकर ऐसा खबर फैला रहा है ताकि यह लोग आगे न बढ़ सके. इस पार्टी के चार सदस्य विक्रांत वत्सल, विद्रोही नवीन, सरकार अखिलेश और प्रशांत कुमार ने एनडीटीवी से खास बात चीत की. आपको बता दें कि विक्रांत और विद्रोही नवीन ने IIT दिल्ली में पढ़ाई की है. सरकार अखिलेश IIT खड़गपुर से जबकि प्रशांत कुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.


सवाल: आपने जॉब छोड़कर पार्टी क्यों बनाई ?  

विक्रांत : हम लोग अपनी कंपनी चला रहे थे. अखिलेश जी जॉब कर रहे थे. हम लोग डेली बेसिस पर जो न्यूज़ देख रहे थे, वह हमें हमारे काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे. हम लोगों की के बीच मीटिंग हुई. आप देख भी सकते हैं कि एससी एसटी एक्ट को जिस तरह से खत्म करने की कोशिश की गई तो एक उसके बाद हम लोगों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया. हम क्लेम नहीं कर रहे हैं लेकिन 2 तारीख को भारत बंद में हम लोगों की भागीदारी बहुत ज्यादा थी. भारत बंद सफल हुआ और पूरे देश में हमने मैसेज क्रिएट किया कि हम लोग 85 प्रतिशत जो बहुजन है, वह बाबा साहब के जो सपने हैं उनको पूरा करने के लायक हो गए हैं अब हम लोग संसद पर कब्ज़ा कर सकते हैं. संसद में हम लोग पूरे बहुमत में आ सकते हैं.
 
सवाल : क्या आप लोगों को लगता है कि पार्टी के जरिए आगे बढ़ सकते हैं. कई सारी पार्टियां हैं जो दलितों के लिए काम कर रही हैं. आप लोगों के अंदर ऐसा क्या खास होगा कि आप उनके लिए सब कुछ कर सकते हैं?
 
विद्रोही नवीन : do not slave any more just go and became master. बाबा साहब का यह कहना था कि आपको मास्टर बनना है, शासक बनना है. जब तक राजनीतिक सत्ता आपके हाथ में नहीं आएगी, डेमोक्रेटिक देश में आप शासक नहीं बन सकते हैं. कोई भी ऐसी पार्टी हमको नहीं दिखी जो प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही हो.  हमें बहुजन समाज को इस देश का शासक बनाना है. इसलिए हम लोग एक प्लेटफार्म लेकर आए हैं समस्या का समाधान तो युवाओं को करना पड़ेगा. उनको आकर कर बोलना पड़ेगा.
 
सवाल : आपको लगता कि दलित सांसद दलितों के लिए काम कर रहे हैं ?

सरकार अखिलेश : SC-ST सीट से जीतकर संसद तो बन जाते हैं लेकिन कहीं ना कहीं अपने समाज को आगे बढ़ाने में कमिटमेंट नहीं दिखा पाते हैं. ग्रास रूट लेवल पर जो चैलेंज उसको खत्म करने के लिए वह प्रतिबद्धता नहीं दिखा पा रहे हैं. यही कारण है कि आज एससी एसटी एक्ट को भी बदलने की कोशिश किया जा रही है. इसके खिलाफ यह लोग वोकल होकर आगे नहीं आए. जो संविधान के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है, अगर हमारे MP वोकल होकर बोलते, सामने आते तो हमारे समाज के लोगों का सपोर्ट मिलता. लेकिन ऐसा नहीं है. हमारे सांसद तो सिर्फ मलाई खा रहे हैं.
 
सवाल: युवाओं का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है?

प्रशांत कुमार : आपको जानकर आश्चर्य होगा हमारे पास 1 दिन में 7000-8000 कॉल आते हैं. ईमेल पर हजारों मेल आते हैं. जनता हमारी जरूरत को समझ गई है. वह हमें प्रोत्साहित कर रही है. हम लोगों ने जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है.

सवाल : क्या आपकी पार्टी RSS स्पॉन्सर्ड है ?

विक्रांत : RSS खुद अपने से ही यह बात बुलवा रही है. RSS के लोग को रिपोर्ट मिल गया है कि हम ग्राउंड में काफी एक्टिव है. कहीं एक ख़ौफ़ है RSS के अंदर है. RSS और दूसरी पार्टियों में समझ में आ गया है कि यह बहुत बड़ी क्रांति लेकर आ रहे हैं.

सवाल: क्या आपके आने से बीजेपी और दूसरी पार्टियों को फायदा नहीं होगा और दलित वोट नहीं बटेंगे?

विक्रांत : हम लोग चुनाव लड़ेंगे तो पूरी कमिटमेंट के साथ लड़ेंगे और आप को आश्वस्त कर रहे हैं कि हम लोग वोट डिवाइड के लिए लड़ाई नहीं लड़ेंगे.  हम लोग जीतने के लिए लड़ेंगे, जीतकर दिखाएंगे यह सब 2020 के चुनाव में हम साबित कर देंगे.

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सवाल:  पार्टी का नाम बहुजन आजाद पार्टी क्यों रखा रखा?

जवाब:  हमारा देश को आजाद हुए 70 साल हो गये. जो बहुजन हैं, जो महिलाएं हैं वो मेन स्ट्रीम में नहीं हैं. वो घर मे हैं, उनके पोटेंशियल का इस्तेमाल नहीं हुआ है. आज हमारे बहुजन समाज को दूसरी संघर्ष की क्रांति शुरू करनी पड़ेगी. तब जाकर के हमारा बहुजन आजाद होगा. इसीलिए हमने इस को बहुजन आजाद पार्टी नाम दिया. 
 
सवाल: आप लोगों को प्रेरणा कहां से मिली ?
 
जवाब: हम लोग कहीं ना कहीं गुस्से में थे. जब मैं  6th क्लास में था तो मुझे पानी पीने से रोका गया था. इसके अलावा भी बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो मन में गुस्सा दिलाता है कि  हम किस समाज में रह रहे हैं और इसमें इतना भेदभाव क्यों हैं. इतना अन्याय क्यों है ? इसीलिए सभी लोग इकट्ठा हुए हैं और बदलाव लाना चाहते हैं.
 
सवाल: आप लोगों ने जो पार्टी बनाई है, क्या इसमें सभी बहुजन समाज से हैं या ऐसे कोई जनरल कैटेगरी के लोग भी हैं?
 
प्रशांत : बहुजन एक विचारधारा है, आप इसको कास्ट से नहीं तौल सकते हैं. बहुजन महात्मा बुद्ध द्वारा दिया गया शब्द है, जो ब्राह्मणवादी विचारधारा को नहीं मानते हैं. जो शोषण पर आधारित व्यवस्था को नहीं मानते हैं. यह अलग बात है कि कि हमारा जो बहुजन ग्रुप है, उसमें ज्यादातर जो लोग ओबीसी एससी-एसटी के हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि फॉरवर्ड कास्ट या अपर कास्ट के लोग हम लोगों से सहमत नहीं हैं, बिल्कुल सहमत हैं.
 
सवाल: क्या सवर्ण आपकी पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं ?
 
जवाब: सपोर्ट तो कर रहे हैं लेकिन कोर कमेटी में जो लोग हैं उसमें हम लोगों ने अपर कास्ट को कोई जगह नहीं दी है.
 



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