NDTV Khabar

Exclusive: ए राजा का दावा, मैंने पीएम मनमोहन सिंह को चेताया था, मुझे खरीदने की कोशिश हो रही है

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
Exclusive: ए राजा का दावा, मैंने पीएम मनमोहन सिंह को चेताया था, मुझे खरीदने की कोशिश हो रही है
नई दिल्ली: देश में अब तक सामने आए सबसे बड़े घोटालों, या यूं कहिए भ्रष्टाचार के सबसे बड़े मामलों में से एक 2-जी स्कैम में अपना पक्ष लेकर जनता के सामने आने के लिए पूरी तैयारी कर चुके हैं पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा, जिन्होंने इसी सिलसिले में 15 महीने का वक्त जेल में भी बिताया है... इसी घोटाले के चलते इस्तीफा देने के लिए मजबूर हुए 53-वर्षीय द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) नेता द्वारा लिखी इस पुस्तक को उनकी पार्टी के नेताओं ने 'पास' कर दिया है, और अब इसके प्रकाशक नवंबर में इसे रिलीज़ करने की तैयारियों में जुट गए हैं...

ए राजा की पुस्तक 'इन माई डिफेंस' (In My Defense) में भी उन्होंने अपने दावे को दोहराया है कि उन्हें उन फैसलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराकर 'बलि का बकरा' बनाया गया, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने मंजूर किए थे, और जिन नीतियों को लेकर उन्हें कसूरवार ठहराया जा रहा है, उन्हें पी चिदम्बरम और प्रणब मुखर्जी जैसे शीर्ष नेताओं ने मिलजुलकर आकार दिया था, क्योंकि ग्राहकों को सस्ती सेवाएं प्रदान करने की वजह से भारत दुनिया के सबसे बड़े सेलफोन बाज़ारों में से एक बन चुका था...

एक ओर जहां ए राजा का कहना है कि लोगों के फायदे के लिए किए गए उन फैसलों से करोड़ों भारतीयों को एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर मिला, वहीं राष्ट्रीय ऑडिटर ने 2010 में कहा था कि 2-जी घोटाले में सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ... इस घोटाले को यह नाम सेकंड जेनरेशन (2-जी) के एयरवेव (या कहिए स्पेक्ट्रम) के आवंटन का मामला होने की वजह से दिया गया था... यह स्पेक्ट्रम उन सभी कंपनियों को मुफ्त में दे दिया गया, जिनके पास बाज़ार से भी कम कीमत पर हासिल किए गए मोबाइल नेटवर्क लाइसेंस मौजूद थे... नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग या सीएजी) का कहना था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी चाहिए थी, और ए राजा ने उन टेलीकॉम कंपनियों को 'आउट ऑफ टर्न' लाइसेंस जारी कर दिए, जिन्होंने उन्हें रिश्वत दी थी...

लेकिन मामले की दिल्ली में जारी सुनवाई के दौरान अपनी पैरवी खुद कर रहे ए राजा ने अपनी पुस्तक में इस टेलीकॉम घोटाले को 'कॉरपोरेट घरानों की जंग और संस्थागत संघर्ष का परिणाम' बताया है... संस्थागत संघर्ष से ए राजा का इशारा टेलीकॉम नीतियों व नियमों को लेकर संसद, कैबिनेट व ट्राई की एक तरह की सोच (सभी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए) और सीवीसी, सीएजी और सीबीआई की अलग तरह की सोच (कमाई के लिए नीलामी होनी चाहिए) से था... वर्ष 2010 में राजा ने टेलीकॉम मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था, और उसके सिर्फ तीन ही महीने बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था...

ए राजा ने पुस्तक में दावा किया है कि 2-जी के लाइसेंसों का आवंटन किए जाने से कई महीने पहले वह प्रधानमंत्री (डॉ मनमोहन सिंह) से मिले थे, और उन लोगों की शिकायत की थी, 'जो उन्हें खरीदना चाहते हैं...' उनका इशारा कॉरपोरेट और उन कैबिनेट मंत्रियों की ओर था, जो कथित रूप से उन पर प्रक्रिया में देरी करते रहने के लिए दबाव डाल रहे थे... उधर, तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह हमेशा कहते रहे हैं कि उन्होंने ए राजा से बोली की प्रक्रिया का पालन करने का आग्रह किया था...

ए राजा लिखते हैं कि नए लाइसेंसों का वितरण किए जाने से पहले ही शीर्ष उद्यमी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देना चाहते थे, ताकि वे अपने पक्ष में माहौल बना सकें... उस वक्त मोबाइल फोनों के लिए ज़्यादा लोकप्रिय जीएसएम प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले एयरटेल और वोडाफोन जैसे ऑपरेटर चाहते थे कि सीडीएमए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाली अन्य कंपनियों (जैसे अनिल अंबानी की रिलायंस कॉम) का रास्ता रोक दिया जाए, और रियल एस्टेट डेवलपर यूनिटेक जैसी कंपनियों का भी, जो टेलीकॉम के क्षेत्र में पांव पसारने की योजना बना रही थीं...

दूसरी ओर, सीबीआई का आरोप है कि ए राजा ने लाइसेंस दिए जाने से पहले अपने घर पर यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा तथा स्वान रियल्टी के शाहिद बलवा से मुलाकात की, जहां ग्रुप ने गलत तरीके से टेलीकॉम अधिकार पाने की साज़िश रची... जमानत पर रिहा होने से पहले ये दोनों भी ए राजा के साथ उन्हें रिश्वत देने के आरोप में जेल में बंद थे... अपनी पुस्तक में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि उन्होंने सितंबर, 2007 में देश के सबसे ज़्यादा सम्मानित व्यवसायियों में से एक भारती टेलीकॉम के मुखिया सुनील मित्तल से भी अपने घर पर मुलाकात की थी...

टिप्पणियां
ए राजा के मुताबिक उस मुलाकात का इंतज़ाम तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ती चिदम्बरम ने किया था... जबकि कार्ती ने NDTV से कहा, "मुझे यह बहुत अजीब लग रहा है कि (सुनील) मित्तल के स्तर के किसी उद्योगपति को किसी कैबिनेट मंत्री से मुलाकात करने के लिए मेरी मदद की ज़रूरत पड़ी होगी..."

उधर, सुनील मित्तल की कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि इस ख़बर पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे...


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement