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अवध यूनिवर्सिटी में नहीं मिला तोमर की डिग्री का कोई रिकॉर्ड: सूत्र

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अवध यूनिवर्सिटी में नहीं मिला तोमर की डिग्री का कोई रिकॉर्ड: सूत्र

अवध यूनिवर्सिटी के रजिस्‍ट्रार कार्यालय में बैठे जितेंद्र तोमर एवं अन्‍य...

नई दिल्ली:

फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार दिल्‍ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस बाबत तोमर ने दिल्‍ली की एक सत्र अदालत में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं, जिस पर अदालत कल सुनवाई करेगी।

उधर, फर्जी डिग्री की जांच के लिए दिल्‍ली पुलिस की टीम तोमर को दोपहर 12 बजे तक यूपी के फैजाबाद लेकर पहुंच गई। यहां जांच अधिकारी पूर्व मंत्री के साथ 45 मिनट से अधिक समय तक रजिस्‍ट्रार कार्यालय में रहे। तोमर ने दावा किया कि उन्‍होंने वर्ष 1998 में अवध विश्‍वविद्यालय के साकेत कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। यूनिवर्सिटी के विश्‍वस्‍त सूत्रों के मुताबिक, तोमर के दावे के मुताबिक यूनिवर्सिटी में कोई दस्‍तावेज नहीं मिला। इसके बाद दिल्‍ली पुलिस तोमर को बिहार के भागलपुर भी ले जाएगी।

लॉकअप से तोमर ने भेजा सीएम केजरीवाल को इस्‍तीफा
गिरफ्तारी के बाद कल कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तोमर ने लॉकअप से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस्तीफा भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा, ‘तोमर ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है और मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार कर लिया। इसे बुधवार सुबह उप राज्यपाल को भेजा जाएगा।’ उन्होंने कहा कि मंगलवार के घटनाक्रम के बाद तोमर ने खुद इस्तीफा दे दिया। यह पूछे जाने पर कि तोमर ने पहले क्यों नहीं इस्तीफा दिया, सिसौदिया ने कहा, ‘यह तो जितेंद्र तोमर ही बता सकते हैं।’ तोमर ने कहा कि वह नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन मैं इस मामले में लड़ूंगा और जीतूंगा। इसके बाद मैं पार्टी के लिए काम करूंगा।’ उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ‘इस साजिश' के पीछे है। 'आप' के एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखते हुए बताया कि तोमर का विकल्प तलाशने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। हालांकि सबसे पहले इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाना प्राथमिकता है।


अब तक का घटनाक्रम...
दिल्ली पुलिस ने जितेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर शाम को साकेत अदालत में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नवनीत बुधिराजा के सामने पेश किया गया। जहां से तोमर को चार दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया।

पुलिस ने तोमर की पांच दिन की हिरासत मांगते हुए कहा कि कानून की डिग्री से जुड़े उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र ‘फर्जी’ हैं और उनकी शैक्षिक योग्यता का पता लगाने के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के फैजाबाद और बिहार के भागलपुर ले जाने की जरूरत है।

पुलिस ने अदालत से कहा कि तोमर ने जिन शैक्षिक प्रमाण पत्रों के असली होने का दावा किया है, वे फर्जी हैं और शुरुआती जांच के दौरान इन प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों ने उनके असली होने से इंकार किया।

पुलिस ने अदालत से कहा, ‘सभी (दस्तावेज) के बारे में या तो संस्थान ने इंकार किया है या हमें नहीं पता कि ये दस्तावेज अस्तित्व में कैसे आए। इसके लिए हमें तोमर से पूछताछ करनी है।’ पुलिस ने कहा, ‘उनके (तोमर) अनुसार, ये सभी दस्तावेज (शैक्षिक प्रमाणपत्र) कथित रूप से सही हैं, लेकिन इन दस्तावेजों पर कथित रूप से हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि उन्होंने ये हस्ताक्षर नहीं किए।’

पुलिस की याचिका का विरोध करते हुए तोमर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुलका और अधिवक्ता राजीव खोंसला ने कहा कि पुलिस ने कानून के प्रावधानों का पालन किए बगैर मंत्री को गिरफ्तार कर लिया और सीआरपीसी की धारा 160 के तहत गिरफ्तारी से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया।

दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस पर आदेश बाद में सुनाया जाएगा। बचाव पक्ष के वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस तोमर के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा, ‘उनका काम इस व्यक्ति को ठिकाने लगाना और उसे सबक सिखाना है। यह एजेंसी द्वारा पूरी तरह से भेदभावपूर्ण जांच है। वे सच सामने नहीं लाना चाहते।’

फुलका ने कहा, ‘मुझे (तोमर) उठाने के बाद, पुलिस मुझसे पूछ रही है कि उन्हें डिग्री दी जाए। यह ऐसा मामला है जहां खुल्लम खुल्ला लापरवाही की गई। यह देश के लिए कालादिन है और अगर यह पुलिस राज जारी रहेगा तो मैं कहना चाहता हूं कि कोई सुरक्षित नहीं है।’ वकील ने अदालत से कहा कि पुलिस हिरासत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि आरोपी ने हमेशा जांच में सहयोग किया है और उनके भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की कोई चिंता नहीं है।

तोमर के वकील ने अदालत से कहा कि पुलिस उन्हें केवल परेशान परेशान करना चाहती है और यह केवल ‘राजनीतिक दुश्मनी’ है।

इन धाराओं के तहत तोमर को गिरफ्तार किया गया है
धारा 420: धोखाधड़ी, 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान
धारा 467: जालसाज़ी, 10 साल तक की सज़ा और जुर्माना
धारा 468: धोखा देने के इरादे से जालसाज़ी, 7 साल तक की सज़ा और जुर्माना
धारा 120 बी: आपराधिक साज़िश

दिल्ली के क़ानून मंत्री की गिरफ़्तारी पर गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि
तोमर जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे इसलिए गिरफ़्तारी की गई
इसके लिए पुलिस को किसी इजाज़त की ज़रूरत नहीं है।
अभी दिल्ली विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है।
स्पीकर को 24 घंटे के भीतर सूचना देनी ज़रूरी।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की गिरफ्तारी में गृह मंत्रालय का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने साफतौर पर कहा कि गृह मंत्रालय किसी की गिरफ्तारी का आदेश नहीं देता। (पढ़ें राजनाथ सिंह की पूरी खबर)

तोमर की गिरफ्तारी पर ये बोले वरिष्ठ वकील तुलसी
दिल्ली के कानून मंत्री की गिरफ्तारी पर वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने कहा है कि ये गिरफ्तारी दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश है।
तुलसी ने कहा- अगर 24 घंटे से ज्यादा गिरफ्तारी रही तो तोमर पद पर नहीं बने रह सकते।
तुलसी ने कहा- अरेस्ट करने की क्या जल्दी थी?
तुलसी ने कहा- केंद्र सरकार ने पहला पत्थऱ फेंका है। 
तुलसी ने कहा- इमरजेंसी के दौरान भी ऐसा नहीं हुआ।
तुलसी ने कहा- मंत्री कहीं भाग नहीं रहे थे, कोर्ट की इजाजत क्यों नहीं ली गई

तुलसी ने कहा - DP के पास पॉवर है लेकिन मामला कोर्ट में है तो ये पॉवर का दुरूपियोग है!

संजय सिंह के मुताबिक, तोमर को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पूर्व सूचना दी गई है। यहां बता दें कि दिल्ली के कानून मंत्री को फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
 
संजय सिंह ने एनडीटीवी इंडिया से कहा- किस बात की गिरफ्तारी की जा रही है? सिर्फ दबाव बनाने की गिरफ्तारी की जा रही है? क्या हमें मुकदमों से डराएगी। थाने में 1 नहीं 1000 बार भेजें, हमें इसकी चिंता नहीं है।
 
संजय सिंह ने इस पूरे मामले पर आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई आगे बढ़ा रही है इसलिए यह कार्रवाई की गई है। संजय सिंह का कहना है कि जितेंद्र तोमर की डिग्रियां फर्जी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह बदले की कार्रवाई है, हम इस पर कदम उठाएंगे।

आप नेता आशुतोष का कहना है कि दिल्ली के अंदर जिस तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, उससे लग रहा है कि दिल्ली ने आप को चुनकर बहुत बड़ा अपराध कर दिया है, ऐसा लगता है। उन्होंने कहा कि अदालत ही तय करेगी कि कौन दोषी है कौन नहीं।
 
आशुतोष बोले, ACB चीफ को जिस तरह से हटाने का काम किया गया और अपनी मर्जी से नियुक्ति की गई उससे साफ लगता है कि केंद्र बौखला गई है। और रही बात डिग्री की तो यह तो अदालत तय करेगी कि डिग्री फर्जी है या नहीं।

हालांकि यहां बता दें कि हमें मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने मंगलवार रात इस मामले में एफआईआर दर्ज की। इसी के बाद गिरफ्तारी की गई।

जानें क्या है पूरा मामला
दिल्ली पुलिस के हौज खास थाने की टीम बिहार में मुंगेर के विश्‍वनाथ सिंह  विधि संस्थान गई थी जहां उसने दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की लॉ की डिग्री से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की थी। तोमर ने इसी कॉलेज से 1994 से लेकर 1999 तक पढ़ाई का दावा किया है।

पुलिस ने कॉलेज प्रशासन से तोमर के लॉ की मार्कशीट और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज हासिल किए और जांच के लिए कई दस्तावेज साथ लेकर भागलपुर के तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय गई थी।

तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय से ही तोमर ने प्रोविजिनल सर्टीफिकेट हासिल किया है। सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया था, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को बताया है कि वहां से तोमर को कोई प्रोविजिनल सर्टीफिकेट नहीं दिया गया है।

दरअसल हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली की बार काउंसिल ने इस मामले की जांच की और कहा कि तोमर की स्नातक और लॉ की डिग्री फर्जी हैं। बार काउंसिल ने बताया था कि उन्हें उत्तर प्रदेश की डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्‍वविद्यालय से जानकारी मिली है कि तोमर ने वहां से स्नातक नहीं किया है।

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वहीं भागलपुर के तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बार काउंसिल ने कहा था कि तोमर जिस प्रोविजिनल सर्टीफिकेट की बात कर रहे हैं वो प्रोविजिनल सर्टीफिकेट नंबर 3687 संजय कुमार चौधरी के नाम है। संजय ने वहां से बीए किया था।

साथ में एजेंसी इनपुट



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