भले ही किसान कर रहे हों आत्महत्या, लेकिन सरकार के मुताबिक बढ़ी है खेती से आमदनी

मध्य प्रदेश में भले ही कर्ज के चलते या फिर फसल बर्बाद होने से किसान आत्महत्या कर रहे हों, लेकिन सरकार का दावा है कि राज्य में किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ है.

भले ही किसान कर रहे हों आत्महत्या, लेकिन सरकार के मुताबिक बढ़ी है खेती से आमदनी

मध्य प्रदेश में इस साल 50 से भी अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं (फाइल फोटो)

भोपाल:

मध्य प्रदेश के किसानों की हालत दुनिया से छुपी नहीं है, उन्हें फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा, सब्जियों को सड़कों पर फेंकना पड़ा है, 50 से ज्यादा किसान कर्ज और फसल बर्बाद होने के चलते आत्महत्या कर चुके हैं, आंदोलन करते छह किसानों जान गई, मगर सरकार का दावा है कि इस वर्ष किसानों की कृषि आय में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि कैबिनेट की बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 के दौरान कृषि आय दो लाख, 22 हजार, 174 करोड़ रुपये रही है. वर्ष 2015-16 के दौरान यह एक लाख, 68 हजार, 427 करोड़ रुपये थी. इस प्रकार, इस वर्ष किसानों की कृषि आय में 53 हजार, 747 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई है. 

बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की सुविचारित व्यावहारिक कार्ययोजना बने. अल्पवर्षा और अवर्षा से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए अल्पकालिक आपात योजना भी बनाएं. सिंचाई और पेयजल की आवश्यकताओं का आकलन करते हुए, जल भंडारण की समुचित तैयारी करें. प्रवाहमान जल को रोकने के सभी समुचित उपाय युद्ध स्तर पर किए जाएं. 

मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देश दिए कि मृदा कार्ड उपयोग का तरीका बताया जाए. जैविक उत्पादों की प्रमाणिकता और विक्रय के आउटलेट खुलवाए जाएं. धान खरीदी के साथ ही भावांतर भुगतान योजना के लिए पंजीयन की पुख्ता व्यवस्था हो. उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण की छोटी-छोटी इकाइयों से बड़ा काम करने के लिए पंचायत स्तर पर इकाइयों की स्थापना कराने के निर्देश दिए. संरक्षित खेती में शेडनेट हाउस को प्रोत्साहित कराने के लिए भी कहा. मुख्यमंत्री ने गेहूं के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में प्रदेश को अव्वल बनाने का लक्ष्य लेकर प्रयास करने के निर्देश दिए. साथ ही कृषि वानिकी विस्तार कार्यक्रम के तहत नर्मदा तटीय क्षेत्रों पर फोकस की जरूरत बताई.

बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने किसान की आय को दोगुना करने के रोडमैप और विगत 18 माह में क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि चना, सोयाबीन, कुल दलहनी फसलें, कुल तिलहनी फसलें, अमरूद, टमाटर कुल जैविक क्षेत्र, जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया में देश में प्रदेश प्रथम स्थान पर है. राज्य में जैविक कपास, सोयाबीन और गेहूं का उत्पादन हो रहा है. खरीफ फसलों की उत्पादकता में वर्ष 2022 के लक्ष्यों की तुलना में बाजरा, अरहर, उड़द और मूंग की उत्पादकता का निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2016-17 में ही प्राप्त कर लिया गया है. 

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

राजौरा के मुताबिक, रबी फसलों जौ और मसूर की वर्ष 2016-17 की उत्पादकता 2022 के लक्ष्य से अधिक हो गई है. आठ फसलों- सोयाबीन, चना, अरहर, मूंग, उड़द, ज्वार, बाजरा और कपास की उत्पादकता राष्ट्रीय उत्पादकता से अधिक हो गई है. कृषि अनुसंधान में मध्यप्रदेश को उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित हुई हैं. 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)