रिटेल में एफडीआई : शीतकालीन सत्र में हंगामे के आसार

खास बातें

  • लेफ्ट के नोटिस के बाद दूसरे विपक्षी दल भी उस पर हमला बोलने को तैयार हैं। और तो और घटक दल भी इस मुद्दे पर खुलकर सरकार के समर्थन में नहीं दिख रहे।
नई दिल्ली:

22 नवंबर से शुरू हो संसद के शीतकालीन सत्र में रिटेल में एफडीआई को लेकर सरकार घिर सकती है। लेफ्ट के नोटिस के बाद दूसरे विपक्षी दल भी उस पर हमला बोलने को तैयार हैं। और तो और घटक दल भी इस मुद्दे पर खुलकर सरकार के समर्थन में नहीं दिख रहे।

सबसे पहले डीएमके की तरफ से ऐलान आया कि वह रिटेल में एफडीआई के खिलाफ है और प्रधानमंत्री को अपना रुख बता देगी। पार्टी सुप्रीमो करुणानिधि ने इस पर सरकार के समर्थन का वादा नहीं किया। करुणानिधि ने कहा कि अभी इस मामले पर ससपेंस बना हुआ है।

सीपीएम ने पहले ही इस मुद्दे पर लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 167 के तहत चर्चा का नोटिस दे रखा है। दोनों में बहस के वोटिंग का प्रावधान हैं।

लेफ्ट की यह पहल सरकार के लिए असली परेशानी का सबब है। उसे अंदाजा है कि विरोधी घेरेंगे और जो उसे बचाएंगे वह उसकी पूरी क़ीमत वसूल करेंगे। फिर भी वह लोकतंत्र की दुहाई देने को मजबूर है।

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उधर, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि रिटेल में एफडीआई पर उसका विरोध जारी रहेगा।  संसद के नए सत्र के पहले सबने तलवारें खींच ली हैं।

शीतकालीन सत्र से ठीक पहले मल्टी−ब्रैंड रिटेल सेक्टर में एफडीआई पर डीएमके की नाराज़गी सरकार को महंगी साबित हो सकती है। विपक्ष पहले ही सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है।