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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ 'गृह युद्ध और रक्तपात' वाले बयान पर FIR दर्ज, जानें पूरा मामला

ममता बनर्जी के खिलाफ एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) के मुद्दे पर असम के डिब्रुगढ़ जिले के नाहरकटिया पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई गई है.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ 'गृह युद्ध और रक्तपात' वाले बयान पर FIR दर्ज, जानें पूरा मामला

FIR में ममता बनर्जी पर असम के साम्प्रदायिक सद्भवना को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है.

खास बातें

  1. असम के डिब्रूगढ़ में दर्ज हुई ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर
  2. प्रदेश के सांप्रदायिक सद्बाव को नुकसान पहुंचाने का लगाया है आरोप
  3. NRC के मुद्दे पर ममता ने कहा था कि देश में गृह युद्ध के हालात बन सकते हैं
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) के मुद्दे पर असम के डिब्रुगढ़ जिले के नाहरकटिया पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई गई है. ममता पर प्रदेश के साम्प्रदायिक सद्भवना को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ शिकायत बीजेपी युवा मोर्चा के तीन लोगों ने लिखवाई है. शिकायत के मुताबिक ममता असम में NRC की शांतिपूर्ण प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं. दरअसल कल गृहमंत्री से मुलाक़ात के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि अगर बंगाल में एनआरसी थोपने की कोशिश की गई तो गृह युद्ध के हालात बन जाएंगे और खून खराबा होगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों से मुलाकात की बात भी कही है. 

यह भी पढ़ें : NRC पर ममता बनर्जी की मोदी सरकार को चेतावनी, 'देश में छिड़ जाएगा गृह युद्ध ', अमित शाह ने दिया यह जवाब... 

ममता बनर्जी ने कहा, 'एनआरसी राजनैतिक उद्देश्यों से किया जा रहा है. हम ऐसा होने नहीं देंगे. वे (भाजपा) लोगों को बांटने का प्रयास कर रहे हैं. इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. देश में गृह युद्ध, रक्तपात हो जाएगा.' ममता बनर्जी के इस बयान के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि ममता बनर्जी कहती हैं कि देश में गृह युद्ध हो सकता है. वह स्पष्ट करें कि किस प्रकार का गृह युद्ध होगा. इस मुद्दे पर वह देश की जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करें. आपको बता दें कि असम में रह रहे असली भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही व्यापक कवायद के तहत अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख से अधिक लोगों को जगह नहीं मिली है. 

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