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फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट: जंगलों में हुई कुछ बढ़ोतरी, शहरों की हरियाली भी बढ़ी

सरकार ने जो नये आंकड़े जारी किये हैं उनके मुताबिक देश में कुल जंगलों का क्षेत्रफल बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है. ये देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.54 प्रतिशत है. शहरों में लगाये गये पेड़ जिन्हें तकनीकी भाषा में ट्री कवर कहा जाता है वह 93,815 वर्ग किलोमीटर है.

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फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट: जंगलों में हुई कुछ बढ़ोतरी, शहरों की हरियाली भी बढ़ी

फाइल फोटो

खास बातें

  1. जंगलों का क्षेत्रफल बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है
  2. भारत में ट्री कवर 93,815 वर्ग किलोमीटर है.
  3. जंगल और ट्री कवर को जोड़ने पर 8,02,088 वर्ग किलोमीटर पर हरियाली है.
नई दिल्ली: सरकार ने जो नये आंकड़े जारी किये हैं उनके मुताबिक देश में कुल जंगलों का क्षेत्रफल बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है. ये देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.54 प्रतिशत है. शहरों में लगाये गये पेड़ जिन्हें तकनीकी भाषा में ट्री कवर कहा जाता है वह 93,815 वर्ग किलोमीटर है.

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जंगल और ट्री कवर को जोड़ने पर 8,02,088 वर्ग किलोमीटर पर हरियाली है. हर दो साल में फॉरेस्ट कवर को लेकर रिपोर्ट जारी की जाती है. पिछली रिपोर्ट 2015 में आई थी  और उसके मुकाबले जंगल औऱ ट्री कवर की सम्मिलित हरियाली में 8021 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई थी. जबकि केवल जंगलों का ही एरिया कुल 6778 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। ट्री कवर यानी शहरों में लगे पेड़ों का कवर 1243 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है.

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक औऱ केरल ने जंगलों की बढ़ोतरी में सर्वाधिक योगदान किया है. 15  राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां जंगल 33 प्रतिशत से अधिक है. अभी पूरे देश में जंगल और ट्री कवर कुल मिलाकर 24 प्रतिशत से अधिक हैं लेकिन सरकार कह रही है कि वह इस कवर को 33 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है.

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सरकार ने जो आंकड़े सोमवार को जारी किये हैं उनके हिसाब से पहाड़ी राज्यों का फॉरेस्ट कवर करीब 2 लाख 83 हज़ार वर्ग किलोमीटर है और यह देश के कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत से अधिक है. सरकार कह रही है कि पहाड़ी राज्यों में फॉरेस्ट कवर करीब 750 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है. यह महत्वपूर्ण है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में केवल 0.04 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर बढ़ा है और यहां घने जंगलों में कमी आयी है यहां कुल जंगल 24 हज़ार वर्ग किलोमीटर से अधिक हैं.

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हालांकि कई जानकार सरकार के दावों से सहमत नहीं होते और कहते हैं कि जंगलों की हालत बहुत अच्छी नहीं है. उनके मुताबिक सरकार का सर्वे जंगलों की सेहत के सही हाल नहीं बताता. इसके लिये पर्यावरणविद् ‘सैंपलिंग त्रुटिपूर्ण’ के तरीके को ज़िम्मेदार मानते हैं.  पर्यावरण के जानकारों के मुताबिक सरकार काटे गये जंगलों की जगह कितने पेड़ लगाये गये इसके भी आंकड़े नहीं देती.


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