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अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 बार देखी थी हेमा मालिनी की यह फिल्म, मिलने वक्त कुछ ऐसी थी हालत...

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) फिल्म स्टार और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी के प्रशंसक थे.

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अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 बार देखी थी हेमा मालिनी की यह फिल्म, मिलने वक्त कुछ ऐसी थी हालत...

अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 बार देखी हेमा मालिनी की एक फिल्म.

नई दिल्ली:

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) फिल्म स्टार और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी के प्रशंसक थे. हेमा मालिनी ने यह बात खुद एक कार्यक्रम के दौरान कही थी. हेमा मालिनी ने बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी एक फिल्म इतनी ज्यादा पसंद आ गई थी कि उन्होंने उसे 25 बार देखी थी. हेमामालिनी ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया, 'तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने उनके लिए प्रचार के लिए कहा था. मां ने भी उनका (आडवाणी) नाम सुनकर प्रचार करने की अनुमति दे दी थी. तब पहला भाषण मां ने ही लिखकर दिया था. सभा में बहुत भीड़ थी, जिससे खुश होकर आडवाणी ने बिहार में प्रचार का न्योता दे दिया'.

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भाजपा सांसद ने बताया, '...उसके बाद तो भाजपा के प्रचार में अक्सर जाने लगी. 2003 में उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनाकर एक बड़ी जिम्मेदारी भी दे दी'. उन्होंने बताया, 'मुझे याद है एक बार मैंने पदाधिकारियों से कहा कि मैं भाषणों में अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करती हूं.. लेकिन उनसे कभी मिली नहीं, मिलवाइए. तब वो मुझे उनसे मिलाने ले गए, लेकिन मैंने महसूस किया कि अटल बिहारी वाजपेयी बात करने में कुछ हिचकिचा रहे हैं'. इस पर मैंने वहां मौजूद एक महिला से पूछा, क्या बात है. अटल जी, ठीक से बात क्यों नहीं कर रहे. उन्होंने बताया, 'असल में ये आपके बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं. इन्होंने 1972 में आई आपकी फिल्म 'सीता और गीता' 25 बार देखी थी. आज अचानक आपको सामने पाकर हिचकिचा रहे हैं'. 


बता दें, अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया है. वे पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी के कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी हैं. भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही है. वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे. आजीवन राजनीति में सक्रिय रहे अटल बिहारी वजपेयी लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन भी करते रहे हैं. वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे हैं और इसी निष्ठा के कारण उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया था. सर्वोच्च पद पर पहुंचने तक उन्होंने अपने संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया.


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