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चार दोस्तों ने एक साथ की भारतीय सिविल सर्विसेज परीक्षा उत्तीर्ण

जानिए दोस्ती और संघर्ष की कहानी अनुभव सिंह से जिन्हे इस बार भारतीय सिविल सर्विसेज परीक्षा में आठवीं रैंक मिली है.

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चार दोस्तों ने एक साथ की भारतीय सिविल सर्विसेज परीक्षा उत्तीर्ण
नई दिल्ली:
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अनुभव सिंह का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में इलाहाबाद के पास के एक छोटे से गांव दसेर में हुआ है और जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई भी पूरी की. नाना का काफी शौक था पढ़ाई में इसलिए वो चाहते थे कि भविष्य में पढ़ाई के लिए वो शहर का रुख करे और इसलिए उन्होंने नौवीं की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद भेज दिया. छोटी सी उम्र में बाहर आने के कारण और माता पिता से दूर रहने के कारण उन्हें काफी मुश्किल हुई, परन्तु भविष्य बनाने के लिए उन्होंने खुद को एक नए माहौल में ढाला और बारहवीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की. वो इंजीनियर बनाना चाहते थे इसलिए एक साल तैयारी की और फिर आईआईटी रुड़की में उनका चयन हो गया जहां से उन्होंने सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई की.

जब वह  इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनके मन में सिविल सर्विसेज का ख्याल आया. ये करियर उन्होंने बहुत सोच समझकर चुना और अपने साथ के तीन दोस्तों के साथ मिलकर कैसे सिविल सर्विसेज की तैयारी की जाए बिना कोचिंग के इसकी रणनीति बनाई. चारों दोस्त इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके गुडगांव आ गए और एकजुट होकर पढ़ाई करने लगे. पर किस्मत कहां हमेशा साथ देती है सबका! जो चार दोस्त सोचते थे कि एक साथ सिविल सर्विसेज का एग्जाम पास करेंगे उसमें से सिर्फ दो ही कर पाए और दो नहीं कर पाए.
 
ये तीन दोस्त हैं कार्तिक, अंकुरजीत और मनीष. मनीष और अनुभव का सिलेक्शन पिछले साल भी हो गया था परन्तु कार्तिक और अंकुरजीत ये परीक्षा नहीं उत्तीर्ण कर पाए. पर इस साल तकदीर को कुछ और ही मंजूर था. इस साल इन चारों दोस्तों ने फिर से परीक्षा दी और सभी चारों इस परीक्षा में सफल हो गए और ये चारों अब फिर से एक साथ हो गए और देश के प्रति जिस सेवा भावना की बातें और समाज में बदलाव की जो बातें चारों एक कमरे में किया करते थे अब वो उससे असल ज़िन्दगी में कर पाएंगे.
 
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अनुभव ने इस कठिन परीक्षा की पढ़ाई स्वयं की है और किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली. उनका मानना है कि अगर आप रास्ते में आने वाली रुकावटों से और हिम्मत लेते रहेंगे तब कोई भी रूकावट आपके सामने नहीं टिक पाएगी और सफलता आपके पैर चूमेगी. अनुभव को अपने पहले ही प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुन लिया गया था, परन्तु चारों दोस्त आईएएस बनाना चाहते थे इसलिए दोबारा तैयारी शुरू कर दी. और आखिरकार उन्हें दूसरे प्रयास में महज 23 साल की उम्र अपना सपना साकार कर लिया.


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