CAB के बहाने गिरिराज सिंह का कांग्रेस पर हमला, कहा - देश विभाजन के लिए नेहरू और कांग्रेस...

गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को जहां इस बिल के लिए धन्यवाद दिया है वहीं कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है

CAB के बहाने गिरिराज सिंह का कांग्रेस पर हमला, कहा - देश विभाजन के लिए नेहरू और कांग्रेस...

गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर कांग्रेस पर बोला हमला (फाइल फोटो)

खास बातें

  • गिरिराज सिंह ने नागरिकता संशोधन बिल का किया स्वागत
  • देश विभाजन के लिए कांग्रेस, नेहरू और जिन्ना जिम्मेदार- गिरिराज
  • नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अल्पसंख्यकों के हीत में लिया फैसला- गिरिराज
नई दिल्ली:

बीजेपी के फायर ब्रांड नेता तथा केंद्रिय मंत्री गिरिराज सिंह ने नागरिकता संशोधन बिल के लोकसभा में पारित होने का स्वागत किया है. गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को जहां इस बिल के लिए धन्यवाद दिया है वहीं कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है. गिरिराज सिंह ने लिखा है, "कांग्रेस/नेहरू और जिन्ना ने 1947 में धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया,आज वहां ना उनका पूजा स्थल सुरक्षित है और ना ही उनकी बहू बेटी. आज मोदी जी-शाह जी जोड़ी ने पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यक का दर्द समझा और उन्हें आश्रय देने का फैसला किया."

गौरतलब है कि लोकसभा में सोमवार को लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया. लोकसभा में विधेयक को पेश किये जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को संविधान के मूल भावना एवं अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की.

Citizenship संशोधन बिल : अमित शाह ने कहा, कांग्रेस अगर धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती

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गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, आईयूएमएल, एआईएमआईएम, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक कहीं भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है और इसमें संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया. शाह ने सदन में यह भी कहा, ‘अगर कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के समय धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती.' नागरिकता अधिनियम, 1955 का एक और संशोधन करने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर-मुसलमानों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो.

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