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गोधरा कांड : SIT ने तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका का किया विरोध, SC ने कहा- बगैर याचिकाकर्ता बने कर सकती हैं मदद

SIT ने तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका का विरोध किया. SIT ने कहा कि पत्रकार तीस्ता द्वारा दाखिल याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि वह ऑरिजनल पेटिशनर नहीं है.

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गोधरा कांड : SIT ने तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका का किया विरोध, SC ने कहा- बगैर याचिकाकर्ता बने कर सकती हैं मदद

SIT ने कहा कि पत्रकार तीस्ता द्वारा दाखिल याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.

नई दिल्ली :

गुजरात में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों को लेकर तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान SIT ने तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका का विरोध किया. SIT ने कहा कि पत्रकार तीस्ता द्वारा दाखिल याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि वह ऑरिजनल पेटिशनर नहीं है. वहीं तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से कहा गया कि वह कोर्ट की मदद करना चाहती हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि तीस्ता सीतलवाड़ बिना याचिकाकर्ता बने सिर्फ इस केस में मदद कर सकती हैं. SIT की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने 400 पेज का आदेश दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने मुहर लगाई .15 साल से केस चल रहा है. यह ऐसे नहीं चल सकता है. अब सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को मामले की सुनवाई होगी. दरअसल, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस दीपक गुप्ता पीठ ने वक्त की कमी के चलते सुनवाई टाल दी है. आपको बता दें कि SIT द्वारा तत्कालीन सीएम मोदी व अन्य को क्लीन चिट को बरकरार रखने के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को जकिया जाफरी और तीस्ता शीतलवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. 

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दरअसल पांच अक्तूबर 2017 को गुजरात हाईकोर्ट ने साफ किया था कि गुजरात दंगों की दोबारा जांच नहीं होगी. जाकिया जाफरी की बड़ी साजिश वाली बात से भी हाईकोर्ट ने इनकार किया था. हालांकि कहा था कि वह आगे अपील कर सकती हैं. याचिका में 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को विशेष जांच दल द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी. दिवंगत पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जाकिया और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस' ने दंगों के पीछे ‘‘बड़ी आपराधिक साजिश'' के आरोपों के संबंध में पीएम मोदी और अन्य को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की थी. 

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