गोरखपुर हादसा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल्यरोग विभाग के इंचार्ज डॉ. कफ़ील अहमद को हटाया गया

गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल्यरोग विभाग के इंचार्ज डॉ. कफ़ील अहमद को हटा दिया गया है.

गोरखपुर हादसा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल्यरोग विभाग के इंचार्ज डॉ. कफ़ील अहमद को हटाया गया

गोरखपुर अस्पताल में दो दिनों में 30 बच्चों की मौत मामले में डॉक्टर कफील खान मसीहा बनकर उभरे हैं.

खास बातें

  • सीएम ने कहा, 'दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जोकि मिसाल बनेगी'
  • 'मुझसे ज्यादा कोई इस समस्या को नहीं समझ सकता है'
  • 'अस्पतालों में देखें कि इस बीमारी से लड़ने के लिए सरकार क्या कर रही है'
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो दिनों के भीतर लगभग 30 बच्चों की मौत की घटना पिछले तीन दिनों से सुर्खियों में है. गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल्यरोग विभाग के इंचार्ज डॉ. कफ़ील अहमद को हटा दिया गया है. शनिवार की रात वॉर्ड में जब ऑक्सीजन की कमी हुई तो वॉर्ड डॉ. कफ़ील अहमद की ही निगरानी में था. इससे पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव कुमार मिश्रा को सस्पेंड किया जा चुका है.

यह भी पढ़ें: गोरखपुर की घटना से सबक, मेडिकल कॉलेजों को दवा और गैस का कोई भी भुगतान बकाया ना रखने का निर्देश

गौरतलब है कि रविवार को हालात का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा करते हुए कहा कि बच्चों की मौत के मामले की गहन जांच कराई जाएगी. उन्‍होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के लापरवाही बरतने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से इस मामले में कोई लापरवाही नहीं हुई. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार हमारी हर संभव मदद कर रही है. उन्‍होंने कहा कि इस हादसे की जांच के लिए चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है. रिपोर्ट के आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जाएगी. दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जोकि मिसाल बनेगी.

यह भी पढ़ें: गोरखपुर में 60 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत : जानें अब तक क्या हुआ...

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

एक दिन पहलेे ही अस्‍पताल के प्रिंसिपल को सस्‍पेंड कर दिया गया था जिसके बाद रविवार को उन्‍होंने हादसे की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए इस्‍तीफा दे दिया.

वीडियो: गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन?