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गोरखपुर हादसा: मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पद से दिया इस्‍तीफा

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन हम उन्हें पहले ही निलंबित कर चुके हैं और उनके खिलाफ जांच भी शुरू की गई है.

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गोरखपुर हादसा: मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पद से दिया इस्‍तीफा

प्रिंसिपल डॉ राजीव मिश्र ने नैति‍कता के आधार पर इस्‍तीफा देने की बात कही.

खास बातें

  1. नैतिकता के आधार पर दिया इस्‍तीफा
  2. उससे पहले राज्‍य सरकार ने सस्‍पेंड कर दिया था
  3. मेडिकल कॉलेज में पिछले दो दिनों में 30 बच्‍चों की मौत हुई
लखनऊ: गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 30 बच्‍चों की मौत के बाद प्रिंसिपल डॉ राजीव मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन हम उन्हें पहले ही निलंबित कर चुके हैं और उनके खिलाफ जांच भी शुरू की गई है. महानिदेशक (चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण) को भेजे पत्र में प्रिंसिपल डा राजीव मिश्र ने कहा कि वह मेडिकल कालेज अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती 30 बच्चों की मौत के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं.

पढ़ें: गोरखपुर- 5 दिनों में 60 बच्चों की मौत पर कौन देगा इन 10 सवालों का जवाब?

सीएम योगी का बयान
उल्‍लेखनीय है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पांच दिनों में 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत की ख़बर पर देश भर में गुस्सा है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की खबरों से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति प्रकरण की जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई तो फिर किस वजह से हुई.

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VIDEO: दोषियों के खिलाफ होगी सख्‍त कार्रवाई- सीएम योगी


उधर, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि बच्चों की मौत का कारण केवल ऑक्सीजन की कमी नहीं है. सवाल ये उठ रहा है कि दो दिन पहले ही जिस अस्पताल का दौरा ख़ुद मुख्यमंत्री ने किया था वहां पर ऐसी बदइंतज़ामी का अंदाज़ा सरकार को कैसे नहीं था ? इस पर सरकार का कहना है कि उस वक़्त ऑक्सीजन का मुद्दा किसी ने नहीं उठाया.पुट: भाषा


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