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शिवसेना की डिमांड, 'पीरियड्स' के लिए महिलाओं को हर महीने मिले एक छुट्टी

शिवसेना नेता शीतल महात्रे ने कहा, 'मैंने एक प्रस्ताव का नोटिस दिया जिसमें कहा गया कि सदन द्वारा इस पहल पर चर्चा और इसे पारित किया जाना चाहिए कि महिलाओं को माहवारी के पहले दिन अवकाश दिया जाए.'

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शिवसेना की डिमांड, 'पीरियड्स' के लिए महिलाओं को हर महीने मिले एक छुट्टी

इटली सहित दुनिया के कई देशों में माहवारी अवकाश का प्रावधान है. तस्वीर: प्रतीकात्मक

खास बातें

  1. महिलाओं के लिए हर महीने माहवारी अवकाश की मांग
  2. शिवसेना नेता शीतल महात्रे ने उठाई मांग
  3. सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी संस्थाओं में इसे लागू करने की मांग
मुंबई: शिवसेना की वरिष्ठ पार्षद शीतल महात्रे ने मांग की कि सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी संस्थाओं में काम कर रही महिलाओं को एक महीने में एक बार 'माहवारी (पीरियड्स) अवकाश' मिलना चाहिए. महात्रे ने कहा, 'मैंने एक प्रस्ताव का नोटिस दिया जिसमें कहा गया कि सदन द्वारा इस पहल पर चर्चा और इसे पारित किया जाना चाहिए कि महिलाओं को माहवारी के पहले दिन अवकाश दिया जाए.' उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य कार्यस्थल को महिलाओं के अनुकूल बढाना और उनकी समस्याओं के इन दिनों में मदद करना है. महात्रे ने दावा किया कि चीन सहित सात देशों में इस तरह की छुट्टी की मंजूरी है.

मालूम हो कि इटली सहित दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां कामकाजी महिलाओं को तीन दिन का सवेतन माहवारी अवकाश दी जाती है. इंडोनेशिया में कंपनियों को पीरियड्स के दिनों में औरतों से कम काम लेना होगा. जरूरत पड़ने पर महिला को छुट्टी भी देनी होगी. वैसे कुछ कंपनियां इस कानून को नहीं मानती. जापान में कई साल पहले इस बात को लेकर आवाज उठाई गई थी. यहां सन् 1947 से ही लड़कियों और महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में छुट्टियां मिलती हैं.

ताइवान में लड़कियों को उन दिनों में अवकाश का प्रावधान है. इसके अलावा यहां की कंपनियों ने यह भी नियम बनाया है कि इन दिनों में महिलाएं घर से भी काम कर सकती हैं. चीन में महिलाओं ने इस कानून को बनाने के लिए बड़े स्तर पर आन्दोलन किया था. यहां पर पीरियड्स के दिनों में छुट्टियां दी जाती हैं. यहां साल 2001 में कानून बना दिया गया था कि उन दिनों में महिलाओं को अवकाश दिया जाएं. इस कानून के बाद यहां रोजगार के अंदर महिलाओं की भागेदारी बढ़ती जा रही हैं.

इनपुट: भाषा


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