राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यों सहित सभी पक्षकारों से चर्चा करेगी सरकार

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नीति को लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है और स्कूली शिक्षा को लेकर 300 कार्यो की पहचान, संगठनवार दायित्व की पहचान और समससीमा का निर्धारण भी कर लिया गया है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यों सहित सभी पक्षकारों से चर्चा करेगी सरकार

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिये राज्यों सहित सभी पक्षकारों से अलग अलग चर्चा करेगा . इस क्रम में 19 सितंबर को सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं केंद्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों की ‘‘विजिटर्स कांफ्रेंस''बुलाई गई है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी . अधिकारी ने ‘भाषा' को बताया, ‘‘ नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिये राज्यों सहित सभी पक्षों से राय एवं सुझाव प्राप्त किये जा रहे हैं . ''उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल के लिये जो अभियान शुरू किया गया है, इस क्रम में सितंबर महीने में अलग अलग पक्षकारों के साथ चर्चा होगी . 19 सितंबर को सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं केंद्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों के साथ बैठक आयोजित की जा रही है.

उन्होंने बताया, ‘‘ 19 सितंबर को सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं केंद्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों की ‘‘विजिटर्स कांफ्रेंस''आयोजित की जा रही है.''कोविड-19 महामारी के मद्देनजर यह सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया जायेगा .इसमें 152 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के विजिटर भाग ले सकते हैं. इसमें आईआईटी, एनआईटी के निदेशकों के भी हिस्सा लेने की संभावना है.

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इससे पहले सात सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों का सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसके उद्घाटन सत्र को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था .इसी सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर अनेक प्रकार के सवाल आप सभी के मन में स्वभाविक रूप से होंगे. ये सभी सवाल महत्वपूर्ण भी हैं.

उन्होंने कहा था,‘‘ हर सवाल के समाधान के लिए हम सब मिलकर काम कर रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय की तरफ से भी लगातार संवाद जारी है. हम सभी को मिलकर ही तमाम शंकाओं और आशंकाओं का समाधान करना है.''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की शिक्षाविदों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के साथ भी चर्चा करने की योजना है ताकि नीति को लेकर समझ बढ़े और इसके उद्देश्य स्पष्ट हों .

गौरतलब है कि हाल में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली जैसे राज्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर कुछ सवाल उठाये थे तथा कुछ अन्य राज् भी कुछ मुद्दों पर स्पष्टता चाहते हैं . समझा जाता है कि मंत्रालय इन राज्यों के साथ विमर्श करके उनकी आशंकाओं का निराकरण करने का प्रयास करेगा .

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मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नीति को लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है और स्कूली शिक्षा को लेकर 300 कार्यो की पहचान, संगठनवार दायित्व की पहचान और समससीमा का निर्धारण भी कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि नयी नीति के तहत सबसे पहले राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे पर काम शुरू होगा और फिर राज्य पाठ्चर्या ढांचे पर काम किया जायेगा .

इसके बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय में सुधार का काम किया जायेगा . एनसीईआरटी द्वारा पुस्तकों को पुन: डिजाइन करने का काम वर्ष 2021-24 के दौरान तीन चरणों में किया जायेगा तथा शिक्षक प्रशिक्षण का कार्य 2021-24 के दौरान होगा . मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीबीएसई द्वारा बोर्ड सुधार का काम 2025-26 तक पूरा होने की उम्मीद है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)